चंडीगढ़। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में हरियाणा के नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सधी हुई चाल चली है। उन्होंने उम्मीदवार मल्लिकार्जुन खरगे का प्रस्तावक बनकर जहां विरोधियों को चित किया। वहीं यह जाहिर कर दिया कि जी-23 के नेताओं के लिए पार्टी हित से ऊपर कुछ नहीं। सुधार समूह के नेताओं को खरगे के साथ खड़ा करने में भी हुड्डा ने अहम भूमिका निभाई। दीपेंद्र भी खरगे के प्रस्तावक बने हैं। आलाकमान की नजर में इससे भूपेंद्र और दीपेंद्र हुड्डा का कद और बढ़ेगा।
जी-23 ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर वीरवार रात नई दिल्ली में रणनीति तैयार की थी। इसमें भूपेंद्र हुड्डा भी शामिल हुए। उन्होंने पूर्व सांसद आंनद शर्मा, महाराष्ट्र के पूर्व सीएम पृथ्वीराज चव्हाण और पंजाब से सांसद मनीष तिवारी के साथ चुनाव पर विस्तार से चर्चा की। यह निर्णय हुआ कि वे सब खरगे का साथ देंगे। उनके नामांकन में भी उपस्थिति दर्ज कराई जाएगी। इस निर्णय पर अमल भी हुआ और हुड्डा ने खरगे का प्रस्तावक बनकर एक तीर से कई निशाने साध डाले। दिल्ली में आलाकमान के पास हुड्डा के जो विरोधी उनके जी-23 में शामिल होने का हवाला देकर काट करते आ रहे थे, अब उनके पास कोई मुद्दा नहीं रहा। हुड्डा ने बीते दिनों कांग्रेस की अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलकर चुनाव को लेकर अपनी स्थिति साफ कर दी थी। इसमें उन्होंने बता दिया था कि वह आलाकमान के निर्णय के साथ हैं। पार्टी में नए बदलाव का हर आदेश उनके लिए मान्य होगा। हुड्डा जी-23 के नेताओं को भी हुड्डा यह बात समझाने में सफल रहे कि पार्टी के निर्णयों के साथ चलना ही उनके लिए सही रहेगा। हुड्डा हरियाणा में अपनी पसंद का प्रदेशाध्यक्ष व अधिकतर डेलिगेट बनवा चुके हैं। अब वह प्रदेश संगठन में अपने ज्यादातर पदाधिकारी, जिलाध्यक्ष और एआईसीसी प्रतिनिधि बनवाने के लिए और मजबूती के साथ लड़ाई लड़ेंगे।