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हिंदी दिवस 2022: हरियाणा में अदालती कामकाज में नहीं लग पाई हिंदी की बिंदी, सवा साल में कानून लागू नहीं

Wed, 14 Sep 2022 10:59 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

भाषा विभाग के प्रधान सचिव अनुराग अग्रवाल ने कहा कि कानून लागू करने की अधिसूचना विभागीय स्तर पर जारी क्यों नहीं हुई, इसके बारे में निदेशालय से रिपोर्ट मांगेंगे। रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock
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विस्तार
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हिंदी में हम, हिंदुस्तान हैं हम। पहचान है हमारी हिंदी, हिंदुस्तान की है ये बिंदी। घर-घर बहती है हिंदी की धारा, विश्व गुरु बनेगा हिंदुस्तान हमारा। हिंदी दिवस के मौके पर इन पंक्तियाें को मद्देनजर रखकर सरकारी तंत्र को खंगालना बनता है। हिंदी की धारा घर-घर तो बह रही है लेकिन अभी तक अदालती कामकाज इसमें नहीं हो रहा। कानून बनने के बावजूद हरियाणा की जिला और सत्र अदालतें अंग्रेजी में ही काम कर रहीं हैं। हिंदी की बिंदी अभी निचली अदालतों की फाइलाें में नहीं लग सकी।

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ढाई साल पहले बने कानून को गजट में अधिसूचित भी किया जा चुका। मगर भाषा विभाग इसे अदालतों में लागू करने की अधिसूचना आज तक जारी नहीं कर पाया। हरियाणा राजभाषा (संशोधन) कानून, 2020 को लागू करने की अधिसूचना का अब तक इंतजार है। सरकारी कार्यालयों में भी पूरा कामकाज अभी तक हिंदी में नहीं होता है। अनेकों फाइल अंग्रेजी में ही चलती हैं।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि संशोधन कानून उस तिथि से लागू होगा, जब भाषा विभाग इसकी अलग से अधिसूचना जारी करेगा। इसके लागू होने की तारीख के छह माह के भीतर सरकार सभी न्यायालयों के स्टाफ को जरूरी संसाधन और प्रशिक्षण मुहैया कराएगी।

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इसके बाद ही यह धरातल पर लागू हो पाएगा। 11 मई 2020 को गजट में हरियाणा राजभाषा (संशोधन) कानून, 2020 अधिसूचित किया गया था। इसे मार्च 2020 में हरियाणा विधानसभा ने पारित किया। 31 मार्च 2020 को तत्कालीन राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने कानून को मंजूरी दे दी।

कानून लागू होने से क्या होगा
सरकार ने हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 में नई धारा 3-ए जोड़ी है। इसके लागू होने पर प्रदेश के सभी सिविल (दीवानी) और आपराधिक (दंड), राजस्व अदालतों, ट्रिब्यूनल में सारे अधिकारिक कामकाज में हिंदी भाषा का इस्तेमाल अनिवार्य हो जाएगा।

वकील विरोध कर चुके
हेमंत ने बताया कि प्रदेश में वकीलों का एक वर्ग जिला एवं अधीनस्थ अदालतों में हिंदी भाषा के इस्तेमाल संबंधी कानून बनने से सहज नहीं है। वह इसका पुरजोर विरोध कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती भी दी गई लेकिन स्टे नहीं मिला।

आठ जून 2020 को भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश शरद बोबडे ने याचिका पर सुनवाई के दौरान मौखिक तौर पर टिप्पणी की थी कि अदालतों में हिंदी भाषा लागू करने में किसी को एतराज नहीं होना चाहिए। हमारे देश में अधिकांश लोग अंग्रेजी भाषा में सहज नहीं है।

रिपोर्ट मंगवाकर उचित कार्रवाई की जाएगी: अग्रवाल
भाषा विभाग के प्रधान सचिव अनुराग अग्रवाल ने कहा कि कानून लागू करने की अधिसूचना विभागीय स्तर पर जारी क्यों नहीं हुई, इसके बारे में निदेशालय से रिपोर्ट मांगेंगे। रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
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