चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए महाराजा पटियाला के निजाम के वंशजों के नाम 6 गांवों की भूमि का मालिकाना हक राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने का आदेश दिया है। हालांकि हाईकोर्ट ने उन्हें कब्जा देने का आदेश जारी करने से फिलहाल इन्कार कर दिया है। अपने आदेश में हाईकोर्ट ने राजस्व रिकॉर्ड में भूमि से पंजाब सरकार का मालिकाना हक हटाने का भी निर्देश दिया है। वर्ष 1927 में सरदार भगवंत सिंह महाराजा पटियाला की रियासत में वजीर थे और वह खानपुर, बंगा, सेखा, तंगराला समेत छह गांवों के मालिक थे। सरदार भगवंत सिंह का पटियाला के महाराजा द्वारा गठित प्रशासनिक समिति के विवाद हो गया और उनको पद से हटाते हुए छह गांवों की जमीन जब्त कर ली गई। महाराजा पटियाला की रियासत और छह गांवों की जमीन को 15 जुलाई, 1948 को मिलाकर 1950 में भारत का एक राज्य पेप्सू (पटियाला पूर्वी पंजाब राज्य संघ) बना दिया गया। इसके बाद 1965 में पेप्सू राज्य को नवगठित पंजाब राज्य में शामिल कर लिया गया।
सरदार भगवंत सिंह ने इन छह गांवों की जमीन लेने के लिए पंजाब सुरक्षा भूमि कार्यकाल अधिनियम 1953 के तहत अदालत में मामला दायर किया। तब तक पंजाब भूमि सुधार अधिनियम 1972 लागू कर दिया गया जिसके तहत भूमि रखने की निर्धारित सीमा 21.5 हेक्टेयर तय की गई थी। सभी पक्षों को सुनने के बाद सरदार भगवंत सिंह के उत्तराधिकारियों द्वारा 7388 कनाल 02 मरला भूमि पर कब्जा करने के लिए दायर किए गए 144 मामलों को खारिज करने का हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया है। साथ ही हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि पंजाब सरकार इन जमीनों पर कब्जे का दावा नहीं कर सकती है। राजस्व रिकॉर्ड में वजीर के उत्तराधिकारियों का नाम दर्ज किया जाएगा, लेकिन हाईकोर्ट ने भूमि का कब्जा दिलाने के लिए आदेश जारी करने से इन्कार कर दिया।