एनएच 44 जाम मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अफसरशाही को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया। साथ ही एनएच जाम रोकने में नाकाम रहने पर हरियाणा सरकार को भी जमकर फटकार लगाई। सोमवार को मामले की सुनवाई आरंभ होते ही हरियाणा के मुख्य सचिव का हलफनामा कोर्ट में पेश किया गया।
हलफनामे में बताया गया कि बीते कुछ वर्षों में अपनी मांगों को मनवाने के लिए हाईवे जाम करने का चलन बढ़ गया है। लोगों को संविधान में विरोध व्यक्त करने का अधिकार दिया गया है लेकिन अन्य लोगों को असुविधा न हो इसके लिए सरकार को भी प्रतिबंध लगाने का अधिकार है। कोर्ट को बताया गया कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब लोगों ने मांगों को मनवाने के लिए हाईवे को जाम किया गया हो। हरियाणा सरकार किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए पहले से तैयार थी।
मुख्य सचिव ने बताया कि हाईकोर्ट में 23 सितंबर की रात को हुई सुनवाई के बाद सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच सुलह हो गई और जाम को खुलवा लिया गया। हलफनामे में बताया गया कि सरकार की ओर से भविष्य में ऐसी घटना न हो इसके लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह चढूनी को हाईकोर्ट का नोटिस मिल गया है लेकिन उनकी तरफ से कोई वकील पेश नहीं हुआ है। इसके बाद हाईकोर्ट ने सुनवाई 12 दिसंबर तक स्थगित करते हुए सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।