चंडीगढ़। भूमि अधिग्रहण कानून में आईएएस अधिकारियों को मुआवजे के विवाद का निपटारा करने की शक्तियां देने को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए पटियाला निवासी जसकरण सिंह ने एडवोकेट देवेंद्र पाल सिंह के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि भूमि अधिग्रहण कानून के तहत सक्षम अधिकारी भूमि का मुआवजा तय करता है। आवासीय, कमर्शियल या कृषि भूमि के लिए अलग-अलग राशि तय की जाती है। यदि किसी को तय राशि से आपत्ति होती है तो उसे आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल के पास जाने का विकल्प दिया जाता है। डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (डीएम) इस
ट्रिब्यूनल का अध्यक्ष होता है और उसे ही मुआवजे की राशि में संशोधन का अधिकार है।
याची ने कहा कि डीएम केंद्र सरकार का अधिकारी होता है और ऐसे में वह केंद्र सरकार के खिलाफ कैसे सुनवाई कर सकता है। डीएम को यह शक्ति देना अपने केस के लिए खुद जज होने जैसा है। इसके साथ ही याचिका में बताया गया कि भूमि अधिग्रहण कानून के तहत न तो हाईकोर्ट और न ही सुप्रीम कोर्ट को मुआवजे की राशि में संशोधन का अधिकार है। डीएम के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की जा सकती है लेकिन कोर्ट केवल मुआवजा तय करने का आदेश रद्द कर सकता है, इसमें बदलाव नहीं कर सकता। हाईकोर्ट मुआवजे की राशि पर पुनर्विचार के लिए सक्षम अधिकारी को आदेश दे सकता है।
याची ने हाईकोर्ट से अपील की है कि कानून में संशोधन का आदेश दिया जाए और अदालतों को मुआवजे की राशि में संशोधन का अधिकार दिया जाए। याची पक्ष की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।