चंडीगढ़। किसान आंदोलन के दौरान जिला मानसा के किसान शुभकरण की पुलिस फायरिंग में मौत होने के मामले में याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जज जयश्री ठाकुर की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की थी। यह जांच कमेटी सोमवार को किसान भवन में याचिकाकर्ता और किसान पक्षों से साक्ष्य और गवाही के तौर पर उनका पक्ष जानने पहुंची। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष एवं याचिकाकर्ताओं में शामिल प्रताप सिंह बाजवा ने जीरो एफआईआर और अन्य साक्ष्यों पर अपना पक्ष रखा। वहीं किसान आंदोलन के दौरान बुरी तरह घायल हुए कुछ किसान अपनी एमएलआर रिपोर्ट लेकर गवाही देने पहुंचे थे।
हाईकोर्ट की जांच कमेटी ने मामले में गवाही शुरू कर दी है। पक्ष जानने के बाद हाईकोर्ट की कमेटी छह महीने के अंदर जांच कर अपनी रिपोर्ट देगी। हरियाणा-पंजाब सीमा पर 21 फरवरी को हुई हिंसा के बाद शुभकरण सिंह की मौत की जांच की मांग को लेकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा द्वारा दायर जनहित याचिका के बाद 7 मार्च को समिति का गठन किया गया था। बाजवा ने बताया कि यह मुकदमा 27 फरवरी, 2024 को बाजवा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एपीएस देओल की ओर से दायर किया गया था और पहली सुनवाई 29 फरवरी को हुई थी। समिति ने 18 अप्रैल को झड़प स्थल का दौरा किया और बाद में गवाहों से सबूत पेश करने और बयान दर्ज करने को कहा था।
बाजवा ने अपने वकील हिम्मत सिंह देओल के माध्यम से समिति से हरियाणा के बाहर किसानों के बयान दर्ज करने का अनुरोध किया था, ताकि घायल किसानों और अन्य प्रत्यक्षदर्शी बिना किसी दबाव के सही तथ्य रख सकें, जिसके कारण शुभकरण सिंह की मृत्यु हुई। समिति ने अनुरोध स्वीकार कर लिया और सोमवार को कमेटी ने किसान भवन चंडीगढ़ में गवाहों की सुनवाई की। बाजवा ने बताया कमेटी ने 30 घायल किसानों के बयान दर्ज करने के लिए कहा है, इसमें कुछ किसान सोमवार को कमेटी के समक्ष पेश हुए। किसानों को घटनास्थल से बरामद आंसू गैस के गोले, गोलियां और विभिन्न बोर के खाली कारतूस जैसे सबूत पेश करने के लिए भी कहा गया है।