माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। लगातार वायु प्रदूषण बढ़ने से सेक्टर-6 सिविल अस्पताल में हार्ट और टीवी के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जांच के बाद डॉक्टर मरीजों को प्रदूषित वातावरण में जाने से रोक रहे हैं। इसके साथ ही खान-पान और खांसी होने पर डॉक्टरों को दिखाने के बाद दवा लेने की सलाह भी दी जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि जो लोग बिना मास्क घूम रहे हैं, उन्हें बाहर नहीं जाना चाहिए। पंचकूला एमडी मेडिसिन डॉ. अश्वनी भटनागर ने बताया कि लगातार वायु प्रदूषण बढ़ने के कारण हार्ट और सांस के मरीजों की संख्या बढ़ी है। मौसम में बदलाव के साथ लोगों को यह दिक्क्त आ रही है। इस मौसम में सांस की नली में सिकुड़न पैदा होती है। इसके साथ ही प्रदूषण बढ़ने के कारण भी लोग इसका शिकार हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि हार्ट के रोजाना 15 मरीज आ रहे थे। अब यह संख्या बढ़कर 30 हो गए हैं। वहीं टीबी के मरीजों की संख्या भी 10 से बढ़कर 20 हो गई है। उन्होंने बताया कि त्योहारी सीजन में वायु प्रदूषण बढ़ने के कारण यह हालात बन रहे हैं।
बुजुर्गों की सेहत का रखना होगा ध्यान
पंचकूला पीएमओ डॉ. उमेश मोदी ने बताया कि बदलते मौसम और बढ़ते प्रदूषण से वैसे तो सभी लोगों को खतरा है, लेकिन बुजुर्गों को सतर्क रहने की ज्यादा जरूरत है। उन्हें सुबह सैर पर जाने से पहले यह देखना होगा कि बाहर धूप है या नहीं। अगर आसमान साफ है तो ही बाहर निकलें। वातावरण में धूल के कण और वायु प्रदूषण का अंदेशा होने पर घर पर ही रहें।
चिकित्सक मरीजों को दे रहे यह सलाह
पंचकूला इमरजेंसी इंचार्ज डॉ. अमरजीत सिंह ने बताया कि अस्थमा रोगियों को धूल, मिट्टी या खुले वातावरण से बचना चाहिए। यदि सांस फूलने लगे तो परिश्रम का काम नहीं करना चाहिए। धूम्रपान नहीं करना चाहिए। ठंडे स्थान और ठंडे पेय पदार्थों से परहेज करना चाहिए। अस्थमा के रोगी को बाहर निकलते समय मास्क लगाना चाहिए। साफ-सफाई न करें और धूल भरे वातावरण में जाने से बचें। धूल से सांस लेने में दिक्कत और अस्थमा अटैक का खतरा बढ़ा सकती है।