मनोवैज्ञानिक, शिक्षाविद और कलाकार के रूप में पहचान रखने वाली गुरमीत सेना अधिकारी की पत्नी और बहू हैं। उन्होंने 46 साल की उम्र में दौड़ना शुरू किया और इसके बाद पर्वतारोहण को लक्ष्य बनाया।
53 साल की उम्र में चंडीगढ़ की बेटी गुरमीत शारदा मितू ने यूरोप और रूस की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर तिरंगा फहराकर इतिहास रच दिया।
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मूल रूप से चंडीगढ़ की रहने वाली और अब दिल्ली में रह रहीं गुरमीत ने 21 अगस्त 2026 को 5642 मीटर ऊंची चोटी पर सफल चढ़ाई की। अभियान में देश की पांच महिला पर्वतारोहियों ने हिस्सा लिया था।
मनोवैज्ञानिक, शिक्षाविद और कलाकार के रूप में पहचान रखने वाली गुरमीत सेना अधिकारी की पत्नी और बहू हैं। उन्होंने 46 साल की उम्र में दौड़ना शुरू किया और इसके बाद पर्वतारोहण को लक्ष्य बनाया। इससे पहले उन्होंने 51 साल की उम्र में अक्तूबर 2024 में नेपाल की 6476 मीटर ऊंची मेरा चोटी और 52 साल की उम्र में जून 2025 में भारत की 6111 मीटर ऊंची माउंट यूनम चोटी फतह की थी। माउंट एल्ब्रुस उनकी तीसरी बड़ी उपलब्धि है।
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पूरे रास्ते मौसम बेहद खराब
गुरमीत ने बताया कि अभियान 11 अगस्त को शुरू हुआ था। तेज ठंड, हवाओं और अचानक बदलते मौसम के कारण टीम को कई दिन अनुकूल मौसम का इंतजार करना पड़ा। आखिरकार 20-21 अगस्त को मौसम साफ हुआ और टीम ने अंतिम चढ़ाई कर सफलता हासिल की।
कई मैराथन के बाद पर्वतारोहण को बनाया लक्ष्य
कई मैराथन दौड़ने के बाद गुरमीत ने पर्वतारोहण को अपना लक्ष्य बनाया। उनका सपना सेवन समिट पूरा करना है, यानी सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर चढ़ाई करना। उनका कहना है कि उम्र सिर्फ एक संख्या है और सपने की कोई उम्र नहीं होती। अभियान का आयोजन एनएसवाई आउटडोर्स ने किया और नेतृत्व प्रसिद्ध पर्वतारोही नरेंद्र सिंह यादव ने किया।