हरियाणा में ग्राम पंचायतें सरकार की पूर्वानुमति से अपनी जमीनें गौशालाओं को चारा उगाने के लिए पट्टे पर दे सकेंगी। ग्राम पंचायतों को अपनी भूमि देने के लिए निदेशक, पंचायत से अनुमति लेनी होगी। राज्य मंत्री अनूप धानक ने सदन में प्रश्नकाल के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतें अपनी भूमि का प्रयोग अपने स्तर पर गौशालाओं की स्थापना के लिए कर सकती हैं। ये गोशालाएं स्वयं या किसी अन्य एजेंसी के माध्यम से भूमि की मलकीयत या पट्टा अधिकार स्थानांतरित किए बिना चलाई जाएंगी। पंचायतें इस कार्य को स्वयं न कर भूमि अन्य एजेंसी को देती हैं तो गोशालाओं के संचालन की इच्छुक इकाइयों को पंचायत से पारित प्रस्ताव अनुसार जमीन गोशाला या नंदीशाला को दी जा सकती है। यह जमीन खुली बोली के जरिये अथवा एकल बिड की अवस्था में न्यूनतम पट्टा राशि 5100 रुपये व 7100 रुपये प्रति वर्ष प्रति एकड़ की दर से 33 वर्षों के लिए पट्टे पर दी जाएगी। 200-300 पशुओं के लिए एक एकड़, 500-700 पशुओं के लिए दो एकड़, 1000-1200 पशुओं के लिए तीन एकड़, 2000 पशुओं के लिए चार एकड़ व इससे अधिक पशुओं के लिए पांच एकड़ भूमि उपलब्ध करवाई जाएगी। भूमि उपलब्ध करवाने का प्रस्ताव ग्राम पंचायतों को पारित कराना अनिवार्य होगा। इसके बाद इच्छुक पार्टियों को डीसी अथवा हरियाणा गो-सेवा आयोग में आवेदन करना होगा। हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 के प्रावधान अनुसार ग्राम पंचायतें पशु फाटक के निर्माण व उसके रख रखाव का कार्य करेंगी। इस उद्देश्य के लिए ग्राम स्तर पर सरपंच की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया जा सकता है। यह समिति खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी और पंचायत समिति की देखरेख में कार्य करेगी। पकड़े गए बेसहारा पशुओं को मुक्त करने की जुर्माना राशि निर्धारित करने का निर्णय ये समिति लेगी।