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अच्छे निजी स्कूलों को सरकारी स्कूल गोद लेने चाहिए : शिक्षा मंत्री

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शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर बोले-निजी स्कूलों की परेशानियों को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है सरकारमाई सिटी रिपोर्टर
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पंचकूला। राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल एलाइंस (निसा) ने रविवार को सेक्टर-5 इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में मंथन सेमिनार आयोजित किया। इसमें हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर मुख्य अतिथि थे। आयोजित सेमिनार में गुर्जर ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति की बेहतरी के लिए शिक्षाविदों की पहल सराहनीय है। मुख्यमंत्री से हुई बातचीत के बाद तय किया गया है कि अच्छे प्राइवेट स्कूलों को कुछ सरकारी स्कूलों को गोद लेना चाहिए। इस काम में सरकार उनको पूरा सहयोग देगी। शिक्षा की बेहतरी के लिए मंच से किए शंखनाद का कायल हूं। शिक्षा नीति के संबंध में निसा की वचनबद्धता से प्रभावित मंत्री ने स्कूल संचालकों को भरोसा दिलाया कि सरकार शिक्षा की बेहतरी के लिए उनके साथ मिलकर काम करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा सरकार प्राइवेट स्कूलों की परेशानियों को खत्म करने के लिए वचनबद्ध है। उन्होंने कहा कि शिक्षा की बेहतरी के लिए मंच से किए शंखनाद का कायल हूं। इससे पूर्व विशेष अतिथि एनसीईआरटी के डायरेक्टर प्रोफेसर दिनेश सकलानी और पद्मश्री डॉ. भारत भूषण त्यागी ने कहा कि देश के शीर्ष शिक्षाविदों ने 75 शंखों के शंखनाद के साथ राष्ट्रीय शिक्षा को ऊंचे मुकाम पर पहुंचाने के मिशन की शुरूआत कर दी है। इनका उद्देश्य भारत को विश्व गुरु बनाना है। देश के प्रत्येक बच्चे को शिक्षित करना है। इस मौके पर निसा के अध्यक्ष डॉ. कुलभूषण शर्मा ने कहा कि देश में आजादी की लड़ाई हरियाणा के अंबाला से शुरू हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि हमारा देश विश्वगुरु बने।

बच्चों को पांच साल से पहले न भेजें स्कूल, घर पर बढ़ाएं आत्मविश्वास
राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर चर्चा के दौरान कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रहीं सुनीता गांधी ने दिए टिप्स
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। बच्चों को पांच साल से पहले स्कूल नहीं भेजना चाहिए। प्ले स्कूल की जगह अभिभावक घर पर उनका आत्मविश्वास बढ़ाएं। घर का माहौल पढ़ाई के लिए अभिभावक तैयार करें, जिससे बच्चे अपना संपूर्ण विकास कर सकें। राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर चर्चा के दौरान मंथन कार्यक्रम में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने वाली सुनीता गांधी ने अमर उजाला से बातचीत में अपने विचार साझा किए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर निसा द्वारा रविवार को सेक्टर-5 इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में आयोजित मंथन सेमिनार के दौरान डिग्निटी एजुकेशन विजन इंटरनेशनल की फाउंडर सुनीता गांधी ने कहा कि बच्चों को प्रयोग करके सीखना चाहिए। इसके लिए पुराने सिलेबस में बदलाव की बहुत जरूरत है। अगर बच्चा प्रयोग करके समझेगा तभी आगे बढ़ पाएगा। इसके लिए वे पांच राज्यों उत्तर-प्रदेश, ओडीसा, झारखंड, मिजोरम और पश्चिम बंगाल में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाना चाहिए, जिससे कि वह हर काम कर सकें। बच्चे को कई बार अभिभावक कम नंबर लाने पर डांट लगाते हैं। इस पर भी बदलाव की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वह देश के कई पिछड़े क्षेत्रों में इस तरह के पढ़ाने के प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि अगर बच्चे अपने आत्मविश्वास के माध्यम से काम करेंगे तो ही वह आगे बढ़ेंगे।
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बच्चे को विषय पर केंद्रित करें
मुनि इंटरनेशनल स्कूल के फाउंडर डॉ. अशोक कुमार ठाकुर ने बताया कि बच्चों को विषय पर केंद्रित किया जाना चाहिए। पुराने सिलेबस को बदलकर विद्यार्थियों को नए तरीके से पढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों को जापानी, अरेबिक, स्पेशनिश, फ्रेंच, जर्मन उनके स्कूल में प्राइमरी स्तर पर सिखाते हैं। इसे सीखकर बच्चे भारत में बैठकर विदेशी कंपनियों में काम करते हैं। इसमें बच्चों को जापानी कंपनियां नौकरी देने के लिए स्कूल स्तर पर आती हैं। बच्चों को भाषाओं की पढ़ाई करवाकर उन्हें अच्छे रोजगार दिए जा सकते हैं।
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