संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। अजनाला तहसील में 168 साल पहले 1 अगस्त 1857 को बंगाल नेटिव इन्फेंट्री की 26वीं रेजिमेंट के 282 भारतीय सैनिकों को अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर फ्रेडरिक हैरी कूपर के आदेश पर एक बड़े जलविहीन कुएं में दफनाकर कुएं को मिट्टी से बंद कर दिया गया था। नरसंहार के 157 साल बाद इस कुएं की खोज कर उसमें दफन किए गए जिंदा और मुर्दा 282 सैनिकों के पिंजरे निकालने में अहम भूमिका निभाने वाले इतिहासकार और शोधकर्ता सुरेंद्र कोछड़ ने शुक्रवार को एसडीएम अजनाला रविंदर सिंह अरोड़ा को एक मांग पत्र सौंपा। मांग पत्र सौंपते हुए उन्होंने बताया कि 28 फरवरी 2014 को उन्होंने अजनाला के स्थानीय लोगों और उक्त कुएं पर स्थापित गुरुद्वारा की कमेटी के सहयोग से हजारों लोगों की उपस्थिति में कुएं में मिले ये अवशेष गुरुद्वारा कमेटी के पूर्व अध्यक्ष के पास हैं। अजनाला प्रशासन द्वारा इन्हें तुरंत बरामद करके संग्रहालय में प्रदर्शनी के लिए रखा जाना चाहिए।