चंडीगढ़। पंजाब के सरकारी कर्मचारियों को प्रोबोशन पीरियड के दौरान पूरा वेतन देने के पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को राज्य सरकार अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी।
वित्त विभाग ने सभी विभागों, बोर्ड, काॅरपोरेशन, स्वायत्त संस्थानों को पत्र लिखकर कहा है कि वह हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करें। पत्र में कहा है कि चूंकि हाईकोर्ट के उक्त आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) पहले ही अपैक्स कोर्ट के विचाराधीन है, इसलिए अब सभी विभाग और बोर्ड-काॅरपोरेशन अपनी तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल करें।गौरतलब है कि हाईकोर्ट को जस्टिस एमएस रामचंद्र राव और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने 100 से अधिक याचिकाओं का निपटारा करते हुए, पंजाब सरकार के 15 जनवरी 2015 के उस नोटिफिकेशन को खारिज कर दिया, जिसमें तय किया गया था कि कर्मचारी को प्रोबेशन के दौरान पूरा वेतन देने की बजाय फिक्स वेतन दिया जाएगा।
हाईकोर्ट ने प्रोबेशन पीरियड को नियमित सेवा करार देते हुए राज्य सरकार को तीन महीने में एरियर देने के आदेश दिए थे। राज्य सरकार ने नियम लागू किया था कि नियमित भरती के जरिए नियुक्त कर्मचारियों व अधिकारियों को प्रोबेशन पीरियड के दौरान फिक्स वेतन दिया जाएगा जोकि संबंधित कर्मचारी की नई नियुक्ति के समय मिलने वाले पे-बैंड और न्यूनतम वेतन के बराबर होगा लेकिन प्रोबेशन पीरियड के दौरान उसे ग्रेड-पे, वार्षिक प्रमोशन या अन्य कोई भत्ते (यात्रा भत्ता छोड़कर) नहीं मिलेंगे। प्रोबेशन का समय सफलतापूर्वक पूरा होने पर संबंधित कर्मचारी को उसके पद के अनुसार मिलने वाले पे-बैंड, न्यूनतम वेतन सहित ग्रेड-पे से शुरू करते हुए पूरे भत्ते दिए जाएंगे। सरकार के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।