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पंचकूला के विस्थापित प्लाट आवंटन घोटाले से जुड़ी फाइल गुम

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चंडीगढ़। हरियाणा के पंचकूला में 2015 में हुए विस्थापित कोटे के प्लॉट आवंटन घोटाले की सीबीआई जांच की फाइल गुम हो गई है। सेंट्रल फाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (सीएफएमएस ) पर फाइल की अंतिम लोकेशन डीजी टीसीपी-महानिदेशक नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के पीए के पास दर्शाई जा रही है, जबकि वहां फाइल नहीं है।
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फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय को 1 जुलाई 2020 को सीबीआई जांच की अंतिम मंजूरी के लिए भेजी गई थी। फरीदाबाद एनआईटी के विधायक नीरज शर्मा ने विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को इस मामले को उठाया। उनके मामला उठाते ही नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग और सरकार स्तर पर हलचल बढ़ गई है। फाइल न मिलने पर मुख्यमंत्री कार्यालय हरकत में आ गया है। जल्द ही जिम्मेदार अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगने की तैयारी चल रही है। मुख्यमंत्री जानना चाहते हैं कि आखिर फाइल गई कहां।
2015 में हुए इस घोटाले की जांच की मांग वर्ष 2016 में विधायक रहते हुए वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने पत्र लिखकर मुख्यमंत्री से की थी। उन्होंने लिखा था कि 8 सितंबर 2015 को 13 प्लॉट के आवंटन में बरती गई धांधली और भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच कराई जाए।
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49 योग्य, 13 प्लॉट के लिए 13 ही बुलाए
विस्थापित कोटे के 13 प्लॉट के लिए 129 लोगों ने आवेदन किया गया था, जिसमें से 49 लोग योग्य पाए गए। जब 2015 में ड्रॉ किया गया तो उसमें सिर्फ 13 लोगों को शामिल किया, प्लॉट भी 13 ही थे। विधायक ज्ञानचंद गुप्ता ने अनियमितताएं को ध्यान में रखते हुए मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। काफी समय तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। गुप्ता के दोबारा आग्रह करने पर 1 जून 2020 को मुख्यमंत्री ने मामला सीबीआई को सौंपने की संस्तुति कर दी। फाइल के सचिवालय से नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के बीच घूमते रहने पर 1 जुलाई 2020 को मुख्यमंत्री ने दोबारा जांच आदेश दिए। उसके बाद से अब 2022 चल रहा है और जांच संबंधी फाइल कहीं नहीं मिल रही।
अंदाजा लगा लें भ्रष्टाचार किस कदर हावी : नीरज
विधायक नीरज शर्मा ने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार किसी कदर हावी है, उसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि मुख्यमंत्री के दो-दो बार के आदेशों को ही नहीं माना जा रहा। हैरानी की बात यह है कि सीएफएमएस पर फाइल की वास्तविक स्थिति ही पता नहीं चल रही। यह बेहद गंभीर मुद्दा है। मुख्यमंत्री इसका कड़ा संज्ञान लें।
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