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ईपीएफओ अधिकारी लोक सेवक, उनके खिलाफ अदालत नहीं ले सकती संज्ञान: हाईकोर्ट

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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ईपीएफओ व ईएसआई अधिकारियों के खिलाफ बठिंडा की अदालत द्वारा आपराधिक मामले में ट्रायल के लिए जारी समन आदेश व इस शिकायत को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह अधिकारी लोक सेवक हैं जिनके खिलाफ संज्ञान लेने का अदालत को अधिकार नहीं है। शिकायतकर्ता के पास एक्ट के अनुसार इन अधिकारियों की कार्रवाई को लेकर अपील का अधिकार है।
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मेसर्स विवेक ब्रिक उद्योग सोसायटी के अध्यक्ष नरेंद्र सिंगला ने बठिंडा की अदालत को शिकायत दी थी कि उसके साथ ईपीएफओ और ईएसआई अधिकारियों ने मिल कर धोखा किया है। 2013 में ईपीएफओ के अधिकारी उससे मिले थे और कहा था कि कर्मियों का ईपीएफ जमा न करवाने पर उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। उस दौरान शिकायतकर्ता से 50 हजार रुपये लिए गए थे और कुछ कागजों पर दस्तखत करवाए गए थे। इसके बाद अब अचानक उसे करीब साढ़े 7 लाख रुपये ईपीएफ राशि लंबित होने का नोटिस भेज दिया गया। उसने कभी भी खुद को पंजीकृत करने के लिए आवेदन नहीं किया और न ही उसके पास नियमित कर्मचारी हैं। उसके पास 5 या 6 डेली वेज लेबर काम करती है।
बठिंडा की अदालत ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए ईपीएफओ व ईएसआई अधिकारियों को ट्रायल के लिए समन भेज दिया। इसी आदेश को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि शिकायतकर्ता को नोटिस भेजा गया था तो वह उसके खिलाफ अपील कर सकता था लेकिन ऐसा न करके आपराधिक शिकायत दे दी गई। यह अधिकारी लोक सेवक हैं और ऐसे में तय प्रावधान के तहत इनके खिलाफ अदालत आपराधिक मामले का संज्ञान नहीं ले सकती। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए समन आदेश और शिकायत को रद्द कर दिया।
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