संपत्ति विवाद से जुड़े एक मामले में बिजली का कनेक्शन काटने के खिलाफ दाखिल याचिका का निपटारा करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि बिजली बुनियादी आवश्यकता है और भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का एक अभिन्न अंग है। जब तक याचिकाकर्ता के पास संपत्ति का कब्जा है, तब तक उसे बिजली से वंचित नहीं किया जा सकता।
यमुनानगर निवासी याचिकाकर्ता ने बताया कि याची व प्रतिवादी का दुकान को लेकर विवाद है। यह विवाद फिलहाल न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। इस विवाद के चलते प्रतिवादी ने याची के बिजली का कनेक्शन काट दिया ताकि याची को दुकान छोड़ने के लिए मजबूर किया जा सके। याचिका के जवाब में प्रतिवादी पक्ष ने बताया कि दुकान की लीज 7 जुलाई 2021 को दी गई थी और 30 सितंबर 2021 को यह लीगल नोटिस के माध्यम से समाप्त हो गई थी। ऐसे में अब दुकान पर याची का अवैध कब्जा है और वह बिजली के कनेक्शन को दोबारा जोड़ने के लिए दावा नहीं कर सकता है।
याची ने कहा कि अभी मामला अदालत में विचाराधीन है और कोर्ट ही फैसला करेगा कि याची का कब्जा वैध है या अवैध। हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि संविधान ने हमें जीवन का अधिकार दिया है और बिजली इसका अभिन्न अंग है। कब्जे को लेकर कोर्ट फैसला करेगी लेकिन फिलहाल बिजली के कनेक्शन का विवाद समक्ष है। कोर्ट ने याची को आदेश दिया कि वह नियमित तौर पर बिजली के बिल का भुगतान करेगा और प्रतिवादी पक्ष को बिजली का कनेक्शन दोबारा जोड़ने का आदेश दिया है।