माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के निर्देशों के पांच साल बाद भी शिक्षा विभाग अपने अधीन आने वाले जिले के सभी स्कूलों में पहली से दसवीं तक के बच्चों के स्कूल बैग का वजन निर्धारित नहीं करवा पाया है। 2018 में गाइड लाइन जारी होने के बाद तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी ने पंचकूला सेक्टर-15 के एक निजी स्कूल में बच्चों का स्कूल बैग चेक किया था। उस दौरान निर्धारित वजन से बच्चों का स्कूल बैग भारी मिला। उस दौरान काफी हंगामा भी हुआ, लेकिन कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। उसके बाद आजतक स्कूलों में गाइड लाइन के अनुसार स्कूली बच्चों के बैगों की जांच नहीं की गई।
नतीजा बस्तों के बढ़े बोझ से नौनिहालों को दोहरा नुकसान झेलना पड़ रहा है। एक तो बच्चों पर पढ़ाई का अतिरिक्त बोझ बढ़ा और जो व्यावहारिक ज्ञान बच्चों को विद्यालयों में मिलना चाहिए था, उसका दायरा लगातार सिमटता गया। सभी स्कूलों में कक्षा पहली से बारहवीं तक पाठ्यक्रम में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम से जुड़ी पुस्तकें बच्चों को पढ़ाने के निर्देश हैं। इसके बावजूद बच्चों की पीठ पर लदे बस्ते का बोझ बढ़ता ही जा रहा है। ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि बच्चे की पीठ पर लदे बस्ते में निजी प्रकाशकों की भारी भरकम पुस्तकें और वर्कबुक डली हैं। निजी स्कूल अपने फायदे के लिए निजी प्रकाशकों की पुस्तकें लगा रहे हैं, जिससे मासूम बच्चों की पीठ पर भी उनके वजन से ज्यादा बस्ते का बोझ हो रहा है।
पड़ताल में मिला वजन
- सेक्टर-15 के पहली और दूसरी कक्षा के बच्चे के बैग का वजन-चार से साढ़े चार केजी
- सेक्टर-7 के एक निजी स्कूल के तीसरी कक्षा के बच्चे का वजन पांच केजी
इन गाइड लाइन का पालन नहीं कर रहे स्कूल
पहली व दूसरी 1.5 किलो
तीसरी से पांचवीं 2-3 किलो
छठी व सातवीं 4 किलो
आठवीं व नौवीं 4.5 किलो
दसवीं 5 किलो
नियमानुसार जिले के सभी निजी सभी स्कूलों को सर्कुलर जारी किया जाएगा। निर्धारित स्कूल बैगों के वजन से ज्यादा पाए जाने पर संबंधित स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही गठित टीम स्कूलों में बैगों की चेकिंग के निर्देश दिए जाएंगे। - सतपाल कौशिक, जिला शिक्षा अधिकारी पंचकूला।