ओपीडी के अलावा इमरजेंसी के मरीजों को हुई परेशानी, परेशान होकर निजी अस्पतालों में इलाज करवाने पहुंचे मरीज
कालका सब डिवीजनल सेंटर, पिंजौर, बरवाला, रायपुररानी और मोरनी सहित 51 डिस्पेंसरियोंं में डॉक्टर हड़ताल पर रहे
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। सेक्टर-6 सिविल अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सिंग ऑफिसरों की हड़ताल के कारण वीरवार सुबह सन्नाटा पसरा रहा। मरीज और तीमारदार इमरजेंसी और ओपीडी में डॉक्टरों और अन्य स्टाफ को खोजता नजर आया, आखिर में निराश होकर निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा। हड़ताल के दौरान एनएचएम, डीएनबी और कंसलटेंट भी मरीजों का इलाज करते नहीं मिले। सीएमओ और पीएमओ ने डॉक्टरों को खोजकर ओपीडी में बैठाकर मरीजों का इलाज करने के निर्देश दिए। सेक्टर-6 सिविल अस्पताल के अलावा कालका सब डिवीजनल सेंटर, पिंजौर, बरवाला, रायपुररानी और मोरनी सहित जिले के 51 डिस्पेंसरियोंं में डॉक्टर हड़ताल पर रहे। डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने के कारण निजी अस्पतालों में अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक भीड़ नजर आई। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (एचसीएमएस) के आह्वान पर लंबित मांगों को लेकर वीरवार से दो दिवसीय भूख हड़ताल शुरू हो गई है। डॉक्टर दिनभर डीजी हेल्थ ऑफिस के सामने भूख हड़ताल पर बैठे रहे। उधर, हरियाणा नर्सिंग वेलफेयर एसोसिएशन के आह्वान पर नर्सिंग ऑफिसरों ने भी 9 से 11 बजे तक दो घंटे डीजी हेल्थ ऑफिस के बाहर धरना देकर प्रदर्शन किया। नर्सिंग ऑफिसरों का कहना था कि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो जल्द ही अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।
सेक्टर-6 सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में इलाज नहीं मिलने के कारण मरीजों ने प्राइवेट अस्पताल में जाकर इलाज करवाया। हड़ताल के कारण कंसलटेंट डॉक्टर, एनएचएम अैर डीएनबी के डॉक्टर की ड्यूटी वार्डों में लगाई गई थी। इस दौरान हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों ने ओपीडी और इमरजेंसी में ड्यूटी दे रहे इन डॉक्टरों को इलाज करने से रोका। इस कारण मरीज परेशान रहे। वहीं आज अन्य बीमारियों के एक भी ऑपरेशन नहीं किए गए। हड़ताल के कारण अस्पताल में खून की जांच, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड भी नहीं हुए। सिविल अस्पताल में सीएमओ डॉ. मुक्ता कुमार और पीएमओ डॉ. उमेश मोदी ने ओपीडी और इमरजेंसी का दौरा कर हालात का जायजा लिया।
इन ओपीडी में नहीं बैठे डॉक्टर
पंचकूला सिविल अस्पताल सेक्टर-6 में एमडी मेडिसिन, यूरोलॉजी विभाग, स्किन, अर्थोपेडिक्स, मनोरोग विभाग, चेस्ट एंड टीबी, गायनी, सर्जरी, कैंसर ओपीडी में डॉक्टर नहीं बैठे। इस दौरान लोगों को इलाज के दौरान जांच में भी समस्या का सामना करना पड़ा। हड़ताल कालका, पिंजौर, बरवाला, मोरनी, रायपुररानी सहित सभी जगह रही।
प्राइवेट में गई इलाज करवाने
मेरी शुगर 450 से अधिक हो गई थी। अस्पताल में आकर पर्ची बनवाई। इसके बाद अभी तक इलाज नहीं मिला है। ओपीडी से डॉक्टर नदारद मिले। अब प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवाने जा रही हूं। - गुलदावरी देवी, निवासी सेक्टर-20
पेट में दर्द और बच्चेदानी में गांठ से रही परेशान
पेट में दर्द और बच्चेदानी में गांठ होने पर रजिस्ट्रेशन काउंटर पर गायनी वार्ड की पर्ची काट दी गई। पर्ची काटने के बाद सही तरीके से इलाज नहीं किया गया। इस कारण परेशानी हुई है। डॉक्टर वहां पर मौजूद नहीं थे। इस कारण इलाज नहीं मिल पाया। -जानकी देवी, निवासी सेक्टर -20
सर्प दंश के बाद नहीं मिला इलाज
मैं खेत में काम कर रहा था। बुधवार की शाम खेत में काम करते समय सर्प ने दंश मार दिया था। वीरवार सुबह परिजन इलाज के लिए सेक्टर-6 लेकर आए लेकिन इमरजेंसी में डॉक्टर नहीं बैठे थे। भर्ती करने के थोड़ी देर बाद अस्पताल के कर्मचारियों ने मुझे प्राइवेट इलाज करवाने को कहा। इसके बाद परिवार के साथ इलाज कराने गया। - प्रिंस, निवासी रत्तेवाली
पक्का प्लास्टर नहीं बांधा
मेरे बेटे का पैर दो दिन पहले टूट गया था। इसके बाद अभी तक पक्का प्लास्टर नहीं बांधा गया है। आज इमरजेंसी और ओपीडी में डॉक्टर नहीं बैठे हैं। इस कारण बेटे का इलाज नहीं हो पाया है। मुझे अन्य दिन इलाज के लिए आना पड़ेगा। इस कारण परेशानी हुई है। -सोनू निवासी रामगढ़
अस्पताल में हड़ताल करने वाले डॉक्टरों ने कई बार इलाज के लिए सभी जगह डीएनबी, एनएचएम और कंसलटेंट डॉक्टरों को रोका। इस दौरान राउंड कर ओपीडी शुरू कराई गई। मरीजों का इलाज किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। -डॉ. मुक्ता कुमार, सीएमओ, पंचकूला सिविल अस्पताल सेक्टर -6
मांगें नहीं मानी गई तो हड़ताल जारी रखेंगे
पंचकूला मेडिकल एसोसिएशन के जिला प्रधान डॉ. मंदीप सिंह ने बताया कि उनकी मांग काफी समय से लंबित है। इस लेकर अब प्रदर्शन करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मांगें नहीं मानी गईं तो हड़ताल जारी रहेगी। इस दौरान डॉक्टरों ने भूख हड़ताल भी की। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार और स्वास्थ्य विभाग के सभी आलाधिकारियों को इस संबंध में ज्ञापन दिया गया था। ज्ञापन देने के बाद भी अभी तक उनकी मांगों पर कोई सुनवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि पीजी करने के लिए डॉक्टरों को एक करोड़ का बाॅन्ड 50 लाख किया जाए। एसएमओ की सीधी भर्ती नहीं की जाए। डॉक्टरों को एसीपी और भत्ते केंद्र सरकार के बराबर मिले। विशेषज्ञ डॉक्टरों का अलग से कैडर बनाया जाए।