एक अभियुक्त ने पुलिस को बताया कि प्रतिबंधित पदार्थों की खेप पाकिस्तान से ड्रोन के जरिये भेजी गई थी। रॉबर्ट मसीह (याचिकाकर्ता) नामक व्यक्ति उन्हें इसके लिए पैसे देता था। जस्टिस रूपिंदरजीत चहल ने कहा कि इन दिनों ड्रोन के जरिये सीमा पार से अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी में लगातार वृद्धि हो रही है।
भारत-पाकिस्तान सीमा से ड्रोन के जरिये अवैध नशीले पदार्थों की बढ़ती तस्करी को राष्ट्रीय सुरक्षा और युवाओं के लिए एक गंभीर चिंता का विषय मानते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इन्कार कर दिया।
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एनडीपीएस अधिनियम के तहत पठानकोट में दर्ज की गई प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि एक अभियुक्त ने पुलिस को बताया कि प्रतिबंधित पदार्थों की खेप पाकिस्तान से ड्रोन के जरिये भेजी गई थी। रॉबर्ट मसीह (याचिकाकर्ता) नामक व्यक्ति उन्हें इसके लिए पैसे देता था। जस्टिस रूपिंदरजीत चहल ने कहा कि इन दिनों ड्रोन के जरिये सीमा पार से अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी में लगातार वृद्धि हो रही है।
अदालत ने कहा कि वर्तमान याचिकाकर्ता को भी भगोड़ा अपराधी घोषित किया गया है और उसके खिलाफ कई अन्य मामले लंबित हैं। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने कहा कि मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच के लिए याचिकाकर्ता से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
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याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि उसे सह-आरोपी हरजीत सिंह उर्फ जीता द्वारा किए गए खुलासे के आधार पर ही आरोपी बनाया गया है और मसीह से कोई बरामदगी नहीं की जानी है।
न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। वर्तमान याचिकाकर्ता पर पाकिस्तान से मादक पदार्थों की आपूर्ति शृंखला का मास्टरमाइंड होने का आरोप है। अब तक की जांच के अनुसार याचिकाकर्ता मादक पदार्थों के एक ऐसे गिरोह का सदस्य पाया गया है जो ड्रोन का उपयोग करके पाकिस्तान से हेरोइन की तस्करी करता था।