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Panchkula News: निचली अदालतों व ट्रिब्यूनलों में पंजाबी में ही काम करने की मांग, पंजाब सरकार से जवाब तलब

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चंडीगढ़। पंजाब की निचली अदालतों व ट्रिब्यूनलों में पंजाबी भाषा में ही काम किए जाने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर पंजाब सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए समय देने की मांग की है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को इस मामले में 20 नवंबर तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। वकील एचसी अरोड़ा और लुधियाना निवासी पूर्व डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी मित्तर सेन गोयल की तरफ से याचिका दाखिल करते हुए 5 फरवरी 1991 के हाईकोर्ट रजिस्ट्रार के फैसले को खारिज करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट सुनैना ने हाईकोर्ट को बताया कि रजिस्ट्रार ने आदेश जारी कर पंजाब की सभी सिविल व क्रिमिनल अदालतों व ट्रिब्यूनलों में कामकाज की भाषा अंग्रेजी तय की थी। इसके बाद सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी थी।
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याचिका में कहा गया कि पंजाब ऑफिशियल लैंग्वेज (अमेंडमेंट) एक्ट, 2008 के मुताबिक पांच नवंबर 2008 को अधिसूचना जारी कर कहा गया था कि छह माह पूरे होने के बाद हाईकोर्ट के अधीन रहने वाली सभी सिविल व क्रिमिनल अदालतों, रेवेन्यू कोर्ट और रेंट ट्रिब्यूनल्स में कामकाज की भाषा पंजाबी होगी। सभी प्रशासनिक विभागों को इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने और स्टाफ को जरूरी ट्रेनिंग देने की बात कही गई थी। इतने साल बीत जाने के बाद भी इसे लागू नहीं किया गया। याचिका में कहा गया कि सिविल प्रोसीजर कोड की धारा 137 व क्रिमिनल प्रोसीजर कोड की धारा 272 के तहत राज्य सरकार जिला अदालतों में कामकाज की भाषा को तय कर सकती है।
अदालती कार्यवाही समझ से बाहर
याचिका में कहा गया कि ज्यादातर याचिकाकर्ता अंग्रेजी नहीं समझते हैं। इसके चलते उन्हें अदालत की कार्यवाही भी समझ में नहीं आती। यही नहीं, अदालत के फैसले भी इंग्लिश में होने के कारण समझ में नहीं आते। ऐसे में समय की मांग है कि जिला अदालतों व ट्रिब्यूनल में कामकाज की भाषा पंजाबी हो।
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