चंडीगढ़। निहंगों की छवि खराब करने का आरोप लगाते हुए पंजाबी फिल्म मसंद के प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने फिलहाल याची को किसी भी प्रकार की राहत से इन्कार कर दिया है। हाईकोर्ट ने अब इस याचिका पर सुनवाई 9 नवंबर को तय की है।
फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग को लेकर बाबा रंजीत सिंह फुला ने एडवोकेट गौरव भईया के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि बाबा अजित सिंह फूला की 28 अगस्त 2008 को अमृतसर की जेल में आग लगाकर हत्या कर दी गई थी। हाल ही में याचिकाकर्ता ने यूट्यूब पर इस फिल्म का ट्रेलर देखा तो पता चला कि इस फिल्म में बाबा फुला सिंह की हत्या की पूरी घटना को दिखाया गया है। फिल्म में याचिकाकर्ता व अन्य को खलनायक के तौर पर दिखाया गया है। फिल्म में निहंगों के पहनावे और रिवाजों को भी सही तरह से प्रदर्शित नहीं किया गया है। यह फिल्म ऐसा दर्शाती है कि निहंग देश के खिलाफ हैं। इसके अलावा इस फिल्म पर उन्होंने और भी कई आपत्तियां जताते हुए फिल्म पर रोक लगाने की मांग की है। शुक्रवार को वकीलों की हड़ताल के चलते किसी भी पक्ष की तरफ से कोई वकील पेश नहीं हुआ था। ऐसे में याचिकाकर्ता ने खुद अपनी याचिका पर हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा। हाईकोर्ट ने फिलहाल बिना कोई निर्देश जारी किए सुनवाई 9 नवंबर तक स्थगित कर दी।