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Panchkula News: एस प्लस 4 योजना पर फंसे करोड़ों, सरकार करे बदलाव, नहीं तो हो जाएंगे बर्बाद

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संवाद न्यूज एजेंसीपंचकूला। स्टिल्ट प्लस चार मंजिला भवनों का बिल्डिंग प्लान सरकार ने बनाया था। उसी पर काम करने के लिए बिल्डरों ने सेक्टरों में महंगे दामों पर प्लॉट खरीदे और करोड़ों रुपये इनवेस्ट कर दिए। अगर इस बिल्डिंग प्लान पर स्थायी रोक लग जाती है तो जिन बिल्डरों के करोड़ों रुपये फंसे हैं, वे बर्बाद हो जाएंगे। यह कहना है हरियाणा प्रॉपर्टी कंसल्टेंट फेडरेशन के पदाधिकारियों का। फेडरेशन ने मंगलवार को सेक्टर-3 स्थित जिमखाना क्लब में पत्रकारवार्ता कर अपना पक्ष रखा और बीच का रास्ता निकालने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इस पर प्रतिबंध लगाना कोई समाधान नहीं है। फेडरेशन ने कमेटी को भी अपने सुझाव ज्ञापन के माध्यम से भेजे हैं।
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फेडरेशन के प्रधान सुरेश अग्रवाल ने कहा कि आने वाले समय के अनुसार खुद को बदलना बहुत जरूरी है। यह भी सत्य है कि जब भी कोई बदलाव होता है तो उसका विरोध भी किया जाता है। इसी तरह कुछ लोग स्टिल्ट प्लस चार मंजिला भवनों का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार इस प्लान में कुछ जरूरी बदलाव करती है तो फेडरेशन को यह स्वीकार है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन आरडब्ल्यूए को इस बिल्डिंग प्लान से परेशानी है, वो चर्चा करें। वे उनको संतुष्ट करने का प्रयास भी करेंगे। इस मौके पर सुनील तनेजा, अशोक पंवार, प्रवीन कौशल, पुष्पेंद्र कौशल, वरुण स्वामी, अक्षय भाटिया, भूपेंद्र तनेजा और डिंपल भी मौजूद रहे।
स्टिल्ट प्लस चार मंजिला भवनों के पक्ष में दी ये दलीलें
- इससे मिडिल क्लास लोगों को अपने बजट में घर मिल जाएगा।
- पहले ही जमीन कम होती जा रही है, इस कारण यह बिल्डिंग प्लान बहुत जरूरी है।
- इससे सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व मिलेगा, जिसे विकास पर खर्च किया जा सकेगा।
- निर्माण कार्यों से हजारों लोगों को रोजगार मिलता है।


ये दिए सुझाव
- भवन निर्माण के दौरान बनाए जाने वाले कॉलम जेसीबी की जगह मैनुअल से बनाए जाएं।
- सभी कॉलम एक साथ बनाने की जगह एक-एक करके बनाए जाएं। एक भरने के बाद दूसरा बनाया जाए।
- स्टिल्ट प्लस चार मंजिला भवन की नींव के साथ ही नौ इंच की खुद की दीवार बनाई जाए ताकि पूरा वजन उस पर ही रहे।
- निर्माण की मंजूरी के साथ ही एक सिक्योरिटी राशि बिल्डर से जमा करवाई जाए। अगर बिल्डर मकानों के नुकसान की मरम्मत या भरपाई नहीं करता है तो उस सिक्योरिटी राशि से उसकी भरपाई कर दी जाए।
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वर्ष-1982 का जो बिल्डिंग कोड और प्लानिंग है, उसको बदलना कानूनी तरीके से संभव नहीं है। यह बदलाव पूरी तरह से असांविधानिक है। इससे जो राजस्व सरकार को मिलेगा वह लोगों की सेहत और सुरक्षा से बढ़कर नहीं है। लोगों के हितों से खिलवाड़ कर राजस्व लेना सरकार को शोभा नहीं देता है। -यशवीर मलिक, प्रदेश अध्यक्ष, हरियाणा स्टेट सेक्टरर्स कंफेडरेशन
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