कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया की तैयारियां तेज, सवालों से घिरी कंपनी
पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों ने नहीं लिया कोई फैसला
कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट लेने वाली कंपनी के कर्मचारियों पर पहले सीबीआई ने किया है केस दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। तीन साल से लंबित 520 कांस्टेबलों की भर्ती प्रक्रिया में सवालों से घिरी कंपनी से कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) की जिम्मेदारी वापस लेने के लिए यूटी पुलिस विभाग ने कोई फैसला नहीं लिया है। बल्कि पुलिस ने इस प्रक्रिया के तहत आवश्यक कार्य पहले से अधिक तेज कर दिए हैं।
15 से 17 नवंबर तक भर्ती प्रक्रिया के लिए सीबीटी टेस्ट लिया जाना है। इस कारण सोमवार को पहले से तय प्रक्रिया के तहत ही काम किया जा रहा है, जबकि कुछ पुलिसकर्मी व उम्मीदवार सवालों से घिरी कंपनी के जरिए सीबीटी प्रक्रिया पूरी करने पर अविश्वास जता चुके हैं। बीते रविवार को पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन में पोस्ट ग्रेजुएट एक कांस्टेबल जगजीत सिंह डीजीपी संजय बेनिवाल के संज्ञान में कंपनी की भूमिका को लेकर आए। उन्होंने डीजीपी को ई-मेल कर शिकायत पत्र में कंपनी के कुछ कर्मचारियों के एसएससी पेपर लीक मामले में फंसे होने का खुलासा किया था। बताया गया कि पेपर लीक मामले में सीबीआई ने कंपनी के आरोपी कर्मचारियों पर केस दर्ज किया था। ऐसे में कंपनी के जरिए 520 कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया का कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट करवाया जाना अनुचित कहा है। डीजीपी से मामले में हस्तक्षेप कर कोई फैसला लेने की अपील की गई है।
वहीं, पूर्व में यूटी पुलिस विभाग ने उक्त कंपनी के अलावा परीक्षा की प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए एसएसपी ट्रैफिक एवं सिक्योरिटी शशांक आनंद की चेयरमैनशिप में एक कमेटी गठित की थी। कमेटी के सदस्य उक्त कंपनी से परीक्षा से पूर्व और बाद तक संपर्क बनाए रखेंगे। बीते तीन वर्ष से कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया किन्हीं न किन्हीं कारणों से लटकी हुई है।