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वाहन चोरी की वारदातें

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स्मार्ट सिटी में शातिर चोर, हर रोज दो वाहन चोरी
235 दिनों में 522 वाहन उड़ाए, रिकवरी 136, अनसुलझे 306, अज्ञात वाहन 52
सबसे ज्यादा बाइक और एक्टिवा चोरी, उसके बाद आता है कार का नंबर
डुप्लीकेट मास्टर चाबी से लॉक को खोलकर चोरी हो रहे हैं दो और चारपहिया वाहन
अमर उजला ब्यूरो
अमित गुप्ता
चंडीगढ़। घर से वाहन लेकर संभलकर निकलें। शातिर चोरों की नजर आपके वाहनों पर लगी होती है। आपके वाहन पार्क करने के बाद उन्हें मौका मिला तो वे गाड़ी लेकर नौ दो ग्यारह हो जाएंगे। बेखौफ चोर हर दिन दो वाहन आसानी से चोरी कर रहे हैं और किसी को भनक तक नहीं लगती। जब तक आप पुलिस को शिकायत करते हैं, चोर वहां से भाग चुके होते हैं, जिसके बाद आपकी शिकायत एक फाइल बनकर रह जाती है। 2018 जनवरी से अगस्त महीने तक 522 वाहन चोरी के मामले सामने चुके हैं। इसमें से सिर्फ 136 केस में पुलिस को कामयाबी मिली है, जबकि 334 केसों को सुलझाने के लिए पुलिस जद्दोजहद कर रही है। पुलिस ने अब तक 52 ऐसे अज्ञात वाहन बरामद किए हैं, जिनके मालिकों का पता नहीं चल सका है।


सबसे ज्यादा दोपहिया वाहन चोरी
शहर में सबसे ज्यादा बाइक और एक्टिवा चोरी होते हैं। इनमें 265 बाइक और 147 एक्टिवा शामिल हैं। इसके बाद कार का नंबर है, जिसका आंकड़ा अब तक 85 पार हो चुका है। इसकेअलावा 10 जीप, 8 थ्री व्हीलर, 5 ट्रक, एक टेंपो और एक टैंकर चोरी को अंजाम दिया जा चुका है। एक और खास बात यह है कि शहर में सबसे ज्यादा साउथ डिवीजन में वाहन चोरी हुए हैं।
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रेकी कर देते है अंजाम
शातिर चोर वाहन चुराने से पहले रेकी करते हैं। जब वाहन मालिक गाड़ी को पार्क कर चला जाता है तो आरोपी डुप्लीकेट चाबी से वाहनों का लॉक या फिर उसके हैंडल को तोड़कर गाड़ी लेकर फरार हो जाते हैं।

ज्यादातर जॉय राइडिंग के लिए करते हैं चोरी
कई केसों में पुलिस छानबीन में सामने आया है युवा वाहन चलाने का शौक रखते हैं। वह वाहन को चोरी कर गेड़ी मारते हैं। जब उसका पेट्रोल खत्म हो जाता है तो वाहनों को पार्कों व अन्य जगह खड़ी कर भाग जाते हैं। हाल ही चंडीगढ़ पुलिस ने ऐसे गिरोह को दबोचा था, जो जॉय राइडिंग का शौक पूरा करने के लिए वारदात को अंजाम देता था।

ज्यादातर आरोपी नशेड़ी
पुलिस के अनुसार शातिर चोर वाहन चोरी कर कई बार उसके पुर्जे को निकालकर दूसरे राज्यों में बेच दिया करते हैं। क्राइम ब्रांच ऐसे कई गिरोह को गिरफ्तार कर चुकी है, जो वाहन चोरी की वारदात को अंजाम देते थे। ज्यादातर पकड़े गए वाहन चोर गिरोह नशे के आदी हैं। चोरी के बाद आरोपी वाहनों को अलग-अलग हिस्सों में बेचकर नशे की लत को पूरा करते है।

बचने के लिए क्या करें
जब आप अपने वाहनों को पार्क करते है तो आसपास देख लें कि आप पर कोई नजर तो नहीं रख रहा है। इसके अलावा दोपहिया वाहन में एक एक्स्ट्रा लॉक लगवाएं। वाहन को ऐसी जगह पार्क करने की कोशिश करें, जहां पर कोई सीसीटीवी कैमरा लगा हो ताकि वाहन चोरी हो जाने से बच सकें।

साल 2018 की शुरुआत से अब तक चोरी वाहन

वाहन चोरी रिकवर अरेस्ट
कार 85 25 10
जीप 10 01 00
बाइक 265 53 33
एक्टिवा 147 51 28
टेम्पो 01 01 00
थ्री व्हीलर 08 04 02
ट्रक 05 01 01

बॉक्स-
डिवीजन चोरी रिकवर अरेस्ट
साउथ 230 63 45
ईस्ट 203 49 20
सेंट्रल 89 23 17

बॉक्स-
साल चोरी
2017 909
2016 616
2015 601
2014 443

कोट्
वाहन चोरी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। चोर रेकी कर वाहनों को चोरी कर ले जाते हैं। ऐसे भी कई मामले सामने आए हैं, जिसमें जॉय राइडिंग के लिए चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया। ऐसे कई वाहन चोर गिरोह को गिरफ्तार किया गया है, जो शहर के अलग-अलग सेक्टरों में चोरी की वारदात करते थे।
-पवन कुमार, डीएसपी क्राइम ब्रांच चंडीगढ़


बॉक्स-
शहर में लगातार क्राइम बढ़ रहा है। पिछले दिनों सेक्टर-38 में कार के नीर्चे ंट लगाकर चोर टायर चोरी कर ले गए। पुलिस को लोगों को अवेयर करना चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा लोग अपने घरों के बाहर सीसीटीवी कैमरा लगवाएं। साथ ही पुलिस और सेक्टर के लोगों में आए दिन एक मीटिंग होनी चाहिए, जिससे काफी हद तक क्राइम को रोका जा सकता है।
-पंकज गुप्ता, प्रेसिडेंट रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, सेक्टर-38 वेस्ट


बॉक्स-
पुलिस अगर मुस्तैदी से काम करे तो शहर में वाहन चोरी की वारदात कम हो सकती है। शहर में अलग-अलग हिस्सों में कैमरे लगने चाहिए। खासकर सेक्टरों के एंट्री प्वाइंट पर जिससे वाहन चोरी की वारदात को रोका जा सकता है।
-गुरदेव सिंह आहलूवालिया, चेयरमैन सोशल वेलफेयर एसोशिएसन, सेक्टर-32, 46

बाक्स-
आए दिन इस एरिया में चोरी होती रहती है। कई बार तो पानी के मीटर तक चोरी चुके हैं। चोरी कि वारदात के बढ़ने के बाद हमारी एसोशिएसन पुलिस से कई बार अपील कर चुकी है कि एरिया में पेट्रोलिंग बढ़ाए, जिससे यहां पर होने वाली चोरी की वारदात कम हो सकती है, लेकिन ऐसा कुछ देखने को नहीं मिल रहा है।
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-विनीत सिंह चौहान, प्रेसिडेंट रेजिडेंट वेलफेयर एसोशिएसन, सेक्टर-61

बॉक्स-
पुलिस हर रोज कहीं न कहीं नाके लगाकर उन लोगों को पकड़ती है, जो हेलमेट न पहने हों या फिर उनके पास कोई कागजात न हो। अगर बीट बॉक्स में तैनात पुलिसकर्मी इतना काम कर ले तो शायद ही वाहन चोरी की वारदात सामने आएगी। बीट बॉक्स के पुलिस को अपने एरिया में बारे में सब कुछ पता होता है, लेकिन वह सही ढंग से अपनी ड्यूटी नहीं करते, जिस कारण चोर वाहनों को चोरी कर वहां से भाग जाते हैं।
आरएस गिल, प्रेसिडेंट हाउस होल्ड वेलफेयर एसोशिएसन, सेक्टर-8
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