इंस्पेक्टर रणजोध सिंह की टीम
के हत्थे चढ़े थे गैंगरेप के दोषी
मुखबिर ने कांस्टेबल को दी थी सूचना
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। देहरादून की युवती से गैंगरेप के तीनों दोषियों को पकड़ने में यूटी की दिन-रात की मेहनत काम आई। गैंगरेप की घटना के बाद से पुलिस दोषियों की तलाश में थी। ऑटो के अधूरे नंबर के आधार पर हर ऑटो स्टैंड और अन्य ठिकानों पर पूछताछ चली। सभी थाना पुलिस अपने-अपने स्तर पर तलाश में थी। इसी बीच सेक्टर-49 थाने के तत्कालीन एसएचओ इंस्पेक्टर रणजोध सिंह और उनकी टीम ने आरोपियों तक पहुंच गई। थाना में तैनात एक कांस्टेबल को पड़ोस में काम कर चुके किसी एक व्यक्ति ने दुराचार के दोषी ऑटो चालक के बारे में जानकारी दी। इंस्पेक्टर रणजोध सिंह ने एक टीम बनाई, जिसमें कांस्टेबल कांस्टेबल अशोक, दविंदर, अश्वनी, संदीप और सनोज शामिल थे।
पहला आरोपी जीरकपुर से दबोचा
1. 23 नवंबर 2017 की रात सबसे पहले मोहम्मद इरफान को जीरकपुर स्थित जेपी अस्पताल के समीप से काबू किया।
2. पुलिस ने पहले मुखबिर से आरोपी की पहचान करवाई, फिर दबोचा।
3. पकड़े जाने के दौरान मोहम्मद इरफान शराब के नशे में धुत था।
4. रात में पूछताछ में जुर्म नहीं कबूला, अगली सुबह पूछताछ में जुर्म कबूल लिया।
5. 24 नवंबर 2017 को कबूलनामे के बाद पुलिस ने दोषी मोहम्मद इरफान को गिरफ्तार कर लिया।
6. इरफान के खुलासे के बाद पुलिस टीम अन्य दोनों दोषियों को गिरफ्तार करने के लिए फैजाबाद रवाना हुई।
7. 25 नवंबर 2017 को इंस्पेक्टर राम रत्न शर्मा की अगुवाई में फैजाबाद पहुंची टीम मोहम्मद गरीब को दबोचने में कामयाब रही।
8. उसके कबूलनामे और उसकी निशानदेही पर पुलिस टीम फैजाबाद से अमेठी गई और वहां से तीसरे दोषी किस्मत अली को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस को मिला था सम्मान
यूटी पुलिस विभाग ने मामले के सुलझने पर कांस्टेबल अशोक को हेड कांस्टेबल के पद पर पदोन्नति दी थी। यूटी पुलिस विभाग ने सेक्टर-49 थाने के तत्कालीन एसएचओ इंस्पेक्टर रणजोध सिंह और थाना मलोया के तत्कालीन एसएचओ इंस्पेक्टर रणजोध सिंह की टीम के करीब 17 पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया था।