हितेश मर्डर केस: सीएफएसएल रिपोर्ट न मिलने से आरोपी मोहम्मद आफताब बरी
19 अगस्त 2016 में दर्ज हुआ था केस, शिकायतकर्ता सुनीता रानी कोर्ट में बोलीं, मेरे सामने नहीं हुई वारदात
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। यूटी पुलिस का 19 अगस्त 2016 में दर्ज किया हत्या का एक केस वीरवार को जिला अदालत में औंधे मुंह गिरा। मनीमाजरा में किराए पर रहने वाले युवक हितेश की चाकुओं से गोदकर हत्या मामले में पुलिस की गवाह बयानों से पलट गई। साथ ही सीएफएसएल रिपोर्ट के भी मेल न खाने से अदालत ने हत्यारोपी मोहम्मद आफताब को बरी कर दिया। थाना पुलिस हत्या के इस मामले में अदालत में साबित नहीं कर सकी। मामले के जांच अधिकारी और अन्य पुलिसकर्मियों के बयानों में भी मतभेद होने पर साक्ष्यों के अभाव में मो. आफताब को बरी किया। पुलिस ने वर्ष 2016 में मनीमाजरा निवासी सुनीता रानी की शिकायत पर मो. आफताब के खिलाफ हितेश की हत्या का केस दर्ज किया था। दर्ज केस के अनुसार सुनीता रानी के घर में हितेश बतौर किराएदार रहता था। 19 अगस्त 2016 को मो. आफताब जानकार हितेश से मिलने आया। पैसों के लेनदेन पर उनके बीच विवाद हो गया, लेकिन लोगों ने उन्हें समझा-बुझाकर मो. आफताब को लौटा दिया। लौटते समय मो. आफताब ने हितेश को जान से मारने की धमकी दी। उसी दिन शाम के करीब छह बजे हितेश मार्केट जा रहा था और उसकी मकान मालकिन भी उसके पीछे-पीछे मार्केट जा रही थी। हितेश गोबिंदपुरा स्थित कम्यूनिटी सेंटर के पास पहुंचा तो मो. आफताब ने उसे रोक कर उसपर चाकुओं से कई वार कर डाले। पीसीआर ने घायल हितेश को पीजीआई पहुंचाया, जहां उसे मृत पाया गया। बचाव पक्ष के वकील गगन अग्रवाल ने बताय कि पुलिस के कब्जे में लिए गए चाकू पर जो खून के निशान मिले, वह मृतक के ब्लड ग्रुप से मेल नहीं खाए। साथ ही मामले में पुलिस की गवाह भी हॉस्टाइल हो गई। मामले के जांच अधिकारी रहे, इंस्पेक्टर हरमिन्द्र सिंह के अनुसार आरोपी मो. आफताब को वारदात के अगले दिन, 20 अगस्त 2016 की दोपहर एक बजे गिरफ्तार किया गया, लेकिन रिकवरी विटनेस एएसआई बहादुर सिंह के अनुसार घटना के अगले दिन उन्होंने 11 बजे जांच ज्वाइन की, तब आरोपी गिरफ्तार किया जा चुका था। मामले की शिकायतकर्ता सुनीता रानी ने अदालत में कहा कि वारदात उसके सामने नहीं हुई थी।