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विजिलेंस के माल खाने से लाखों की ट्रैप मनी गायब
अफसरों के आदेश में पांच थाना मुंशी के खिलाफ केस दर्ज
तलाश के दौरान राशि और घर से बरामद सोने चांदी के गहने और घड़ियां भी नहीं मिलीं
तत्कालीन पांच थाना मुंशी नामजद
दविंदर पाल सिंह
मोगा। थाना विजिलेंस ब्यूरो फिरोजपुर के माल खाने से फीके गुलाबी रंग में रंगी आरोपियों से बरामद लाखों रुपये की ट्रैप मनी, तलाशी में बरामद अन्य राशि और आरोपियों के घर मिली लाखों रुपये की नकदी के अलावा सोने चांदी के गहने और घड़ियां खुर्द-बुर्द होने का मामला सामने आया है। विजिलेंस अफसरों के आदेश में पांच पुलिस कर्मियों के खिलाफ इस संबंध में केस दर्ज किया गया है।
जानकारी के अनुसार एसएसपी विजिलेंस फिरोजपुर की हिदायत पर डीएसपी विजिलेंस पलविंदर सिंह संधू और इंस्पेक्टर सतप्रेम सिंह विजिलेंस ब्यूरो, मुक्तसर के नेतृत्व में 5 अधिकारियों की टीम ने थाना विजिलेंस ब्यूरो फिरोजपुर के मालखाने की इस वर्ष 20 फरवरी 2018 को पड़ताल की थी। पड़ताल के दौरान मालखाने से आरोपियों से बरामद ट्रैप मनी, तलाशी में बरामद अन्य एक लाख से अधिक रकम के अलावा 24 घड़ियां, सोने, चांदी की अंगुठियां, मोबाइल, 78 बोरी चावल इत्यादि समान खुर्दबुर्द होने के बारे में आधिकारियों को रिपोर्ट दी गई थी। विजिलेंस ब्यूरो के उच्च अधिकारियों के आदेश पर इस थाने में तैनात पांच तत्कालीन थाना मुंशी हवलदार हरिंदर सिंह, एक अन्य हरिंदर सिंह, राजपाल, रविंदर कुमार के खिलाफ धारा 409 /120बी और भ्रष्टाचार एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। विजिलेंस सूत्रों मुताबिक विजिलेंस के एक अन्य इंस्पेक्टर के खिलाफ भी घूस मांगने के आरोप में केस दर्ज किया गया है।
पंजाब में छह विजिलेंस थाने भरे पड़े हैं
विजिलेंस सूत्रों अनुसार पंजाब में छह विजिलेंस थाने हैं, जिनके मालखाने रिश्वत के आरोपियों से बरामद राशियों, तलाशी वाले कपड़ों व अन्य सामान से भरे पड़े हैं। रिश्वत के आरोपी तो अदालतों से छुटकारा पाने के बाद कपड़े लेना ही भूल जाते हैं। मालखानों में अकेले पेंट शर्ट ही नहीं, बल्कि तौलिएं, जुराबें, बनियान, कंबल और कोट भी पड़े हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह की साल 2002 -2007 की सरकार दौरान विजिलेंस के थानों में पेंट, शर्ट, जींस, जैकेटों की तो जैसे बाढ़ आ गई थी। तब बड़ी संख्या में रिश्वतखोर पकड़े गए थे।
बरी होने के बाद वापस लेना पसंद नहीं करते
रिश्वत के आरोपी अदालत में से बरी होने बाद विजिलेंस से अपने कपड़े वापस ही नहीं लेते। विजिलेंस किसी अफसर और मुलाजिम को घूस लेते पकड़ती है तो शर्ट या पेंट आदि से बरामदगी होने पर यह कपड़े विजिलेंस की केस प्रॉपर्टी बन जाते हैं। वैसे रिश्वत के आरोपी इन कपड़ों को वापस लेना पसंद नहीं करते। क्योंकि जिन कपड़ों ने इन्हें जेल दिखा दी उन्हें वह मनहूस मानते हैं।