होमगार्ड को 3 साल कैद, 10 हजार जुर्माना
खाने का बिल न चुकाकर गोली चलाकर दी थी धमकी
अमर उजाला ब्यूरो
होशियारपुर।
जिला व सत्र न्यायाधीश सुनील कुमार अरोड़ा की कोर्ट ने पुलिस की वर्दी का रौब दिखा खाने का बिल न चुकाने व राईफल से फायर करने के आरोपी होम गार्ड जवान को दोषी करार देते हुए उसे पांच साल की कैद व 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई हैं। जुर्माना न देने पर दोषी को तीन महीने की अतिरिक्त कैद काटनी होगी।
उल्लेखनीय है कि 25 अप्रैल 2015 को इंद्रजीत सिंह पुत्र गुरचरण सिंह निवासी वार्ड नंबर 13 नजदीक टेलीफोन एक्सचेंज गढ़शंकर ने पुलिस के पास शिकायत दर्ज करवाई थी। उसने अपनी शिकायत में बताया था कि वो करीब तीस साल से उक्त पते पर रह रहा और गढ़शंकर चंडीगढ़ रोड पर पनाम के पास जीटी रोड पर ए वन नाम का ढाबा हैं। उसने बताया ढाबे का मालिक उसका बड़ा भाई कमलजीत सिंह जो 25 अप्रैल 2015 को घरेलू काम के चलते घर से बाहर गया हुआ था जिसके कारण वे अपने चालक कृष्ण लाल पुत्र शादी राम निवासी अनाज मंडी के साथ ढाबे पर था। सोनू और कृष्ण ढाबे पर काम कर रहे थे कि रात साढ़े दस बजे संतोख सिंह पुत्र गुरचरन सिंह निवासी कौलपुर बलाचौर शहीद भगत सिंह नगर अपने दो अन्य साथी के साथ आया। उसने बताया वो दोनों समुंदड़ा चौकी में तैनात है। इस दौरान उन्होंने दाल रोटी का आघरझ़्र किया इस दौरान दूसरा कर्मी एक साइड पर बैठ गया, रोटी खाने के बाद बने हुए बिल मुताबिक उसने संतोख से 80 रुपये की मांग की तो संतोख ने पहले उसके साथ बहसबाजी की फिर उसे गालियां निकाल कहा कि वो पुलिस कर्मी है और तुम मुझसे पैसे कैसे मांग सकते हो और बिना पैसे दिये ही मौके से जाने लगा तो मौका पाकर अपनी हाथ में पकड़ी सरकारी थ्री नाट थ्री राइफल को लोड करके कृष्ण लाल की तरफ तान दी और कहा अगर किसी ने उसे रोका तो वे उसे जान से मार देगा। इस दौरान उसने राइफल से फायर कर दिये जो कृष्ण लाल के हाथ से लगने के बाद पार हो गया। इसके बाद संतोख सिंह ने अपने हाथ में पकड़ी राइफल को जमीन में पटक दिया और वो टूट गई। जिसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचित किया और कृष्ण लाल को पीजीआई इलाज के लिए लेकर गए। जिसके बाद इंस्पेक्टर कुलविंदर सिंह ने होम गार्ड संतोख सिंह को सरकारी राइफल से कृष्ण लाल को गोली मारने के आरोप में उसके खिलाफ हत्या की नियत से हमला करने के आरोप में मामला दर्ज कर लिया। आज कोर्ट ने उसे दोषी करार देते हुए पांच साल की कैद की सजा सुनाई।