पंचकूला। चंडीगढ़ के सेक्टर-51 स्थित अजंता एन्क्लेव के मकान नंबर-3086 के सेकंड फ्लोर निवासी हरीश गुलाटी की याचिका पर डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल फोरम ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के खिलाफ फैसला सुनाया है। फोरम ने मामले में आरोपी बनाए एसबीआई के चेयरपर्सन समेत जनरल मैनेजर और पंचकूला के सेक्टर-6 स्थित शक्ति भवन की एचएसईबी, एसबीआई पर लगे आरोपों को सही ठहराया है। फोरम ने आरोपियों को केस फाइल के समय से जारी किए आदेशों तक नौ प्रतिशत ब्याज के अलावा 37,499 रुपये देने के आदेश सुनाए हैं। साथ ही शिकायतकर्ता को मानसिक तनाव के 15 हजार और मुकदमा खर्च के 5500 रुपये भी देने होंगे। शिकायतकर्ता हरीश गुलाटी ने दायर केस में बताया था कि 28 जून 2016 की सुबह उनके मोबाइल नंबर पर तत्कालीन एसबीओपी एवं वर्तमान में एसबीआई से किसी व्यक्ति ने स्वयं को बैंक कर्मचारी बताकर उनका एटीएम-कम-डेबिट कार्ड बंद होने का संदेश दिया था। ऐसा नहीं होने के लिए उनसे एटीएम नंबर और सर्विस चार्ज के 10 रुपये लगने की बात कही थी। हरीश को सुबह 9:39 बजे बैंक से प्राप्त संदेेश में ओटीपी नंबर मिला। इस ओटीपी को हरीश ने बैंक के कॉलर से साझा किया, ताकि दस रुपये कट सकें। अगले ही मिनट सुबह 9:40 बजे उन्हें मोबाइल पर ओटीपी सहित दूसरा संदेश 49,999 के लिए प्राप्त हुआ। हरीश ने इस संदेश को नजरअंदाज कर दिया और इस संबंध में मोबाइल पर आए ओटीपी को भी बैंक के कॉलर या किसी अन्य से साझा नहीं किया था। लेकिन सुबह 9:40 बजे तत्कालीन एसबीओपी की तरफ से हरीश गुलाटी के बचत बैंक खाते से 49,999 रुपये विड्रा हो गए। फिर हरीश ने तुरंत संबंधित बैंक के मैनेजर को इस अनाधिकृत विड्रॉल के बारे में सूचना दी और 30 जून 2016 को लिखित शिकायत भी दी। 22 अगस्त 2016 को बैंक ने इस अनाधिकृत विड्रॉल की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया। जबकि जांच में पाया गया कि 49,999 की रकम उनके बचत खाते से पेयूमनी.कॉम के माध्यम से विड्रॉ हुई थी। इस संबंध में हरीश सेक्टर-6 के पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराने पहुंचे। लेकिन पुलिस ने 11 जुलाई 2016 को महज डीडीआर दर्ज की। शिकायतकर्ता हरीश ने बैंक को एक लीगल नोटिस भी भेजा लेकिन बैंक अधिकारियों ने उन्हें कोई जवाब नहीं दिया। मामले में आरोपी बनाए चेयरपर्सन और जीएम ने अपने काउंसिल के माध्यम से फोरम के समक्ष अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि किसी भी एटीएम कार्ड व पिन नंबर और ओटीपी के बिना बैंक खाते से रकम विड्रॉ होना संभव ही नहीं। उन्होंने बताया कि हरीश के मोबाइल नंबर पर जो ओटीपी भेजा गया था, वह 47,999 रुपये के लिए ही भेजा था। फोरम ने दोनों पक्षों को सुनकर बैंक अधिकारियों के खिलाफ आरोपों को सही ठहराकर हरीश के पक्ष में फैसला दिया।