संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। सेक्टर-1 स्थित रेड बिशप के रिजॉर्ट में निर्देशक, फिल्म निर्माता और स्क्रीन राइटर विवेेक अग्निहोत्री ने शिरकत की। दूसरे मास्टर क्लास सत्र का शीर्षक कहानी से सिनेमा रखा गया था। सत्र में कश्मीर फाइल के निर्देशक विवेेक अग्निहोत्री ने कहा कि बिना कॉमन मैन के सिनेमा जगत का उद्धार नहीं हो सकता। पिछले कुछ दशकों की फिल्मों के बदलते परिवेश का जिक्र कर उन्होंने यह बात कही। हर दशक में विलेन की बदलती भूमिका का जिक्र कर उन्होंने ने कहा 60 के दशक में फिल्मों में पहले मिल मालिक विलेन हुआ करते थे।
70 से 80 के दशक में विलेन की एंट्री डाकुओं के रूप में हुई। 80 से 90 के दशक में पुलिस के विलेन का आकार ले लिया। 20 के दशक के आते -आते विलेन मुख्य रूप से मामा, चाचा होने लगे पर सभी दशकों में चीज कॉमन रही वह थी विलेन का अंत कॉमन मैन के जरिए। अगर आपको सिनेमा को समझना है तो आप सबसे पहले सिनेमा के विलेनों को समझना होगा। अग्निहोत्री ने कहा कि आज के समय में फिल्मों से कॉमन मैन को फिल्मों से बहूत दूर कर दिया गया है। कॉमन मैन पर आधारित फिल्मों की कहानी हमें अंदर तक झकझोर कर रख देने के साथ हमें सोचने पर मजबूर कर देती है।
इसलिए फिल्म निर्माण से पहले यह पता होना बेहद जरूरी है कि फिल्म का उद्देश्य किया है। कहानी का आम लोगों से जुड़ा होना बेहद जरूरी है। भारतीय सिनेमा की फिल्में शुरू से लोगों से जुड़ी रही। उन्होंने ने कहा कि भारत जैसी सिनेमा की जिंदगी कहीं नहीं रही है। पहले दिन का पहले सत्र का विषय भारतीय सिनेमा, मनोरंजन या एजेंडा रखा गया। इसमें मशहूर निर्देशक डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी, संदीप भूतोडिया, अनंत विजय राज और कन्हैया मित्तल ने तमाम फिल्मों का जिक्र करते हुए कहा कि विस्तार से चर्चा की।