माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस वीरवार को दिन में करीब 2.10 पर गोंडा रेलवे स्टेशन से खुली। महज 25 मिनट बाद करीब 2.35 में ट्रेन के कोच लड़खड़ाने लगे। कुछ समझ पाते तब तक एसी के डिब्बों ने करवट लेना शुरू कर दिया और फिर वे पलटते चले गए। देखते ही देखते ट्रेन में कोहराम मच गया। ट्रेन से कूदते समय कई लोगों का सिर बिजली के खंभों से टकराकर फट गए। कुछ के पांव और हाथ में चोट आई है। जो ट्रेन में फंसे थे, वे चीखने चिल्लाने लगे तो यात्रियों की शोर सुनकर ग्रामीण भी मदद के लिए महज पांच से सात मिनट के भीतर पहुंच गए। इसके बाद घायलों को बाहर निकालना शुरू किया। पुलिस और प्रशासन को मौके पर पहुंचने में 45 मिनट का समय लगा। इसके बाद लोगों को एंबुलेंस के जरिए घायलों अस्पताल पहुंचाया गया। ये आंखों देखी घटना ट्रेन में सवार उज्ज्वल और आदित्या ने बताई। रेल हादसे की वजह से चंडीगढ़ से हेल्पलाइन विंडो स्थापित कर दी गई है।
1500 रेल यात्री ट्रेन में थे सवार
बुधवार को ट्रेन रात 11.39 बजे चंडीगढ़ से रवाना हुई थी। वीरवार को दोपहर झिलाही स्टेशन के पास गोंडा मनकापुर रेल खंड पर चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस के 14 डिब्बे पलट गए थे। इस ट्रेन में करीब 1500 रेल यात्री सफर रह रहे थे। आरक्षित यात्रियों की संख्या करीब 1200 थी। इसमें सेकंड एसी में 52, थर्ड एसी में 288, स्लीपर क्लास में 820 यात्री शामिल थे। इसके अलावा जनरल डिब्बों में करीब 300 यात्री सवार थे। इसमें एसी कोच में सवार यात्री सबसे ज्यादा घायल हुए है। इस घटना के करीब दो घंटे बाद अंडाला डिवीजन ने हेल्प लाइन नंबर जारी कर दिया था।
ट्रेन की खिड़की से कूदकर बचाई जान
उज्ज्वल ने बताया कि वह मुजफ्फरपुर का रहने वाले है। वह अमरनाथ और माता वैष्णो देवी माता के दर्शन के बाद चंडीगढ़ अपने दोस्त से मिलकर चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस से लौट रहे थे। गोंडा से ट्रेन आगे बढ़ी और महज 35 मिनट के भीतर लड़खड़ाने लगी। उस समय वह मोबाइल फोन पर फिल्म देख रहे थे, तभी अचानक तेज झटका लगा और मोबाइल फोन नीचे गिर गया। वह तुरंत कोच के ऊपर के बोगी से नीचे उतरे ट्रेन तेजी से लड़खड़ाने लगी, तभी लोगों ने शोर मचाना शुरू कर दिया कि ट्रेन के कोच पटरी से उतरने लगे हैं। उज्ज्वल ने बिना कुछ सोचे समझे खिड़की से कूदकर अपनी जान बचाई। उज्ज्वल ने बताया कि ग्रामीण मौके पर तुरंत पहुंच गए, लेकिन पुलिस प्रशासन को मौके पर पहुंचने में करीब 45 मिनट का समय लग गया। इस बीच ग्रामीणों ने कुछ को बाहर निकाला, जो ट्रेन में फंसे रह गए उन्हें रेस्क्यू कर ट्रेन से बाहर निकालने का सिलसिला शुरू हुआ। तब तक घायल एसी डिब्बों में फंसे रहे। उज्ज्वलने बताया कि ट्रेन का आधा हिस्सा पानी में डूबने गया था। उस छोर के लोग बचे नहीं होंगे। मौत का आंकड़ा ज्यादा है, लेकिन कम दिखाया जा रहा है।
चलती ट्रेन से कूद गया आदित्या
चंडीगढ़ पंजाब विश्व विद्यालय में बीएसी का छात्र आदित्या ने बताया कि जैसे ही चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस के डिब्बे पलटने लगे। वह चलती ट्रेन से कूद गया। ट्रेन की रफ्तार स्लो थी, तो उसके पांव में हल्की चोट आई है। इस तरह का हादसा पहली बार देखा था। करीब 45 मिनट तक ट्रेन से कूदने के बाद सदमे में था। समझ नहीं आ रहा था, क्या करूं। गांव वालों ने पानी पिलाया। उसके बाद हादसे की सूचना घर वालों को दी। आदित्या ने बताया कि वह बरौनी का रहने वाला है।
बाल बाल बच गए यात्री
मोहाली निवासी डोमी पंडित ने बताया कि वह चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस में एसी कोच में सफर कर रहे थे। अचानक तेज झटका लगा और ट्रेन का डिब्बा पलट गया। सिर में चोट और मैं बेहोश हो गया। लोगों ने ट्रेन से बाहर निकाला। हाथ और पैर में चोट आई है। आज इस हादसे में भगवान ने बचाया है।
हादसे के बाद खुद आना पड़ा रेलवे स्टेशन तक
चंदन साहनी ने बताया कि गोंडा मनकापुर रेल खंड पर चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस पलटने के बाद रेल यात्रियों को खुद ऑटो और बस कर मनकापुर रेलवे स्टेशन तक आना पड़ा। रेलवे और प्रशासन की ओर से नहीं मिला मदत। यहां से स्पेशल ट्रेन में सवार होकर अपने गनतव्य तक पहुंचेंगे।