चंडीगढ़। चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष हरमोहिंदर लक्की की पार्षद जसवीर सिंह बंटी को अवैध हिरासत में बताते हुए मुक्त करवाने (बंदी प्रत्यक्षीकरण) की मांग को लेकर दाखिल याचिका पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह कानूनी प्रक्रिया का गलत प्रयोग है।
16 जनवरी की रात में चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष हरमोहिंदर लक्की ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि पार्षद जसवीर सिंह बंटी को होटल में कैद किया गया है और उन्हें किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा है। रात करीब 1 बजे इस याचिका पर जस्टिस आलोक जैन ने सुनवाई की थी और चंडीगढ़ पुलिस को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया था। 17 जनवरी को अवकाश होने के चलते जस्टिस जैन ने मामले की घर पर सुनवाई करने का निर्णय लिया था। बुधवार को पुलिस की तरफ से जवाब दायर कर याचिका की वैधता पर सवाल उठाए गए। कोर्ट को बताया गया कि बंटी ने यह बयान दिया है कि वह किसी भी अवैध हिरासत में नहीं हैं, बल्कि वह विधिवत संरक्षित हैं। सभी पक्षों को सुनने व जवाब को देखने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि वर्तमान याचिका कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग प्रतीत होती है।
सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ पुलिस के वकील ने कहा कि कांग्रेस के पार्षद जसवीर सिंह बंटी ने चंडीगढ़ पुलिस से सुरक्षा मांगी थी। उन्हें 18 जनवरी को होने वाले नगर निगम के चुनाव को लेकर खतरा था इसलिए चंडीगढ़ पुलिस ने उसे सुरक्षा दी है और वह हाउस अरेस्ट नहीं हैं। बुधवार सुबह कांग्रेस के प्रधान लक्की से मिले हैं, जिन्होंने यह याचिका दायर की है। लक्की न तो बंटी के कोई रिश्तेदार हैं और न ही उनके कोई गार्जियन है। ऐसे में इस याचिका को रद्द कर दिया जाए।
इसके विरोध में लक्की के वकील ने कहा कि पुलिस ने फोटो खींचने के लिए सुबह मुलाकात करवा दी। उसके बाद फिर दोबारा से किसी को नहीं मिलाया जा रहा है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।