चंडीगढ़। कब्रिस्तान की भूमि को प्लॉटों के रूप में आवंटित करने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब वक्फ बोर्ड को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही मनरेगा के पैसों को पंचों के रिश्तेदारों में बांटने के आरोपों पर केंद्र व पंजाब सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।याचिकाकर्ता सेवा सिंह राय ने एडवोकेट नितिन शर्मा के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए बताया कि 2005 में केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी नेशनल रूरल इंप्लायमेंट गारंटी एक्ट (मनरेगा ) लागू किया था। इसका मकसद ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करना था। इस एक्ट को गावों में लागू करने का जिम्मा ब्लॉक विकास अधिकारी का था जिसने गांव के सरपंचों की सिफारिश पर रोजगार के अवसर प्रदान करने थे और गावों का विकास करना था।
मनरेगा की आड़ में कपूरथला के ब्लॉक विकास अधिकारी व गांव नडियाल के सरपंच ने मिलीभगत कर पंचायत के सदस्यों व अपने निकट संबंधियों को मनरेगा के तहत रोजगार के अवसर दिए और बिना काम उन्हें वेतन दिया जा रहा है। यही नहीं याचिका में बताया गया कि दोनों ने अनुसूचित जाति के लोगों को कब्रिस्तान की भूमि अवैध रूप से प्लाॅटों के रूप में आवंटित कर दी। इस संबंध में याची ने केंद्र व पंजाब सरकार के संबंधित विभागों के अधिकारियों को समय-समय पर शिकायतें दीं, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि सारे मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए और दिए गए वेतन की रिकवरी की जाए। हाईकोर्ट ने इस मामले में वक्फ बोर्ड को आवश्यक पक्ष मानते हुए नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।