चंडीगढ़। डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड में कूड़े के पहाड़ की समस्या को लेकर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रशासन से कहा कि कचरा प्रबंधन प्लांट को लगाते हुए न केवल नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की गाइडलाइन बल्कि आसपास रह रहे लोगों को होने वाली समस्याओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने अब इस प्लांट को लेकर याचिकाकर्ता को विशेषज्ञों के सुझाव व सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट मैनुअल अपनाने व सफल होने वाले शहरों का ब्योरा सौंपने का आदेश दिया है।
2016 में दीप्ति सिंह तो वहीं 2021 में एडवोकेट अमित शर्मा ने जनहित याचिका दाखिल करते हुए डड्डूमाजरा में कूड़े के पहाड़ के कारण आसपास के लोगों को होने वाली परेशानी का मुद्दा उठाया था। हाईकोर्ट लगातार इस मामले को लेकर सुनवाई करता आ रहा था। बुधवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट मैनुअल जो भारत सरकार की ओर से तैयार किया गया है इसे अपनाने वाले कई शहरों ने कचरा प्रबंधन में उल्लेखनीय कार्य किया है। हाईकोर्ट ने इसपर याचिकाकर्ता को इसका उदाहरण पेश करने को कहा तो याची ने बताया कि इंदौर इस मामले में सबसे अच्छा उदाहरण है। हाईकोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई पर ऐसे और स्थानों के नाम सौंपे जाएं जहां कचरा प्रबंधन को लेकर सफलता पाई गई है।
सुनवाई के दौरान नगर निगम ने हाईकोर्ट को बताया कि अब वह कचरा प्रबंधन का प्लांट लगाने जा रहे हैं। इसके लिए टेंडर जारी किया जा चुका है। हाईकोर्ट ने इसपर कहा कि प्लांट लगाते हुए निगम को विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखना चाहिए। स्थानीय लोग इस प्लांट के कारण प्रभावित न हो इसको ध्यान में रखते हुए उपाय किए जाने चाहिए। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि एनजीटी के मानकों का किसी भी प्रकार से उल्लंघन न हो। हाईकोर्ट ने अब नगर निगम को इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।