चंडीगढ़। खुद को पीएमओ से नियुक्त अफसर बता चंडीगढ़ के सेक्टर 51 में घर व कॉमर्शियल बूथ अलॉटमेंट का झांसा देकर करोड़ों की ठगी के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी के बेटे विजय पाल सिंह को जमानत देने से इन्कार कर दिया है। विशाल सागर ने पुलिस को शिकायत देते हुए बताया था कि मंजीत कौर ने खुद को सेक्टर 51 की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष बताया था। साथ ही यह भी बताया था कि वह प्रशासक द्वारा हाऊस अलॉटमेंट के लिए बनाई गई स्पेशल कमेटी की सदस्य हैं और उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय ने नियुक्ति दी है। मंजीत कौर ने सेक्टर 51 व 38 में हाउसिंग बोर्ड के मकान व बूथ की अलॉटमेंट का झांसा देते हुए 44073000 रुपये याचिकाकर्ताओं के खाते से अपने खाते में ट्रांसफर करवाए।
इसके बाद भी जब अलॉटमेंट नहीं हुई तो याचिकाकर्ताओं को ठगे जाने का अहसास हुआ। शिकायत के आधार पर सेक्टर 49 पुलिस ने मंजीत कौर, विजय पाल सिंह (याचिकाकर्ता) व याची की पत्नी मल्लिका के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। याची विजय पाल ने हाईकोर्ट को बताया कि वह बीमार है और ऐसे में उसे जमानत दी जाए। साथ ही इस मामले में लाभार्थी न होने की भी बात कही थी। यूटी पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि याची शारीरिक रूप से पूरी तरह से ठीक है। जहां तक मानसिक रोग की बात है तो याची ने अपनी मां के खाते से खुद 47 लाख रुपये निकाले थे तो ऐसे में वह मनोरोगी भी नहीं है। याची व उसकी पत्नी ने मंजीत कौर के खाते से 68 लाख रुपये अपने संयुक्त खाते में ट्रांसफर किए थे, ऐसे में वह इस राशि का लाभार्थी भी रहा है। कोर्ट को बताया गया कि मंजीत कौर के खाते में जहां पहले 44073000 रुपये थे वहीं अब केवल 77 रुपये हैं। ऐसे में परिवार ने मिल कर इस गबन की राशि का इस्तेमाल किया है। हाईकोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए याची विजय पाल सिंह को जमानत से इन्कार कर दिया है।