चंडीगढ़। श्री दरबार साहिब से पवित्र ग्रंथ साहिब जी के 328 स्वरूप गायब होना गंभीर मामला है। संगतों को मुफ्त मुहैया कराई जाने वाली सरायों को आलीशान होटलों में बदलकर व्यवसायीकरण करने और गुरुघर के लंगर की जूठन में भी घोटाला होने की जांच होनी चाहिए। युवाओं के नशाखोरी का शिकार होने जैसे मामलों से पंजाब की जनता बेहद त्रस्त है। ऊपर से एक के बाद एक कांग्रेस, अकाली-भाजपा और अब आप के भी आशाओं पर खरा न उतरने से निराशा का भी माहौल है। इस सबको देखते हुए श्री दरबार साहिब के पूर्व हुजूरी रागी पंथिक प्रमुख और विश्वप्रसिद्ध कीर्तनकार जत्थेदार बलदेव सिंह वडाला ने शुक्रवार को शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह की 185वीं पुण्यतिथि पर राजनीतिक दल शेर-ए-पंजाब दल के गठन की घोषणा की। चंडीगढ़ प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वडाला ने पार्टी के गठन के कारणों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केंद्र और पंजाब की राजनीति में पंजाब और पंथ के हितों को नजरअंदाज किया गया है। चाहे वह कांग्रेस सरकार हो, अकाली-भाजपा हो या अब आम आदमी पार्टी, या इनमें से दलबदलू नेता हों। यहां तक कि पंजाब की क्षेत्रीय पार्टी होने का दावा करने वाले शिरोमणि अकाली दल का उद्देश्य केवल परिवार के लिए सत्ता हासिल करना ही रह गया है, जिसके कारण यह कभी पंथक कहे जाने वाला दल हाशिए पर पहुंच गया है और अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है।
इस मौके पर उपस्थित सदस्यों में गुरमीत सिंह थूही, कार्यकारी पंजाब अध्यक्ष भाई जोगिंदर सिंह, सहायक सचिव भाई अमरपाल सिंह, कोषाध्यक्ष गुरवतन सिंह व अन्य लोग उपस्थित थे।