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जानवर बोल नहीं सकते, लेकिन एक समाज के तौर पर हमें उनके लिए बोलना होगा : हाईकोर्ट

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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने लापरवाही से गाड़ी चलाकर भैंसों को मारने और घायल करने के आरोपी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को समझौते के आधार पर रद्द करने से इन्कार कर दिया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जानवर बोल नहीं सकते, लेकिन एक समाज के रूप में हमें उनके लिए बोलना होगा क्योंकि जानवरों को शारीरिक अखंडता, सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार है। उन्हें केवल एक संपत्ति के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
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बस चालक सोहन सिंह ने पंजाब के संगरूर में 31 अक्तूबर, 2016 को आईपीसी की धारा 279, 429 के तहत दर्ज मामले को समझौते के आधार पर रद्द करने की मांग की थी। याची पर आरोप है कि उसने लापरवाही से गाड़ी चलाकर दो भैंसों को टक्कर मारी थी। हादसे में एक भैंस की मौत हो गई थी और दूसरी बुरी तरह से घायल हो गई थी। याची ने शिकायतकर्ता जो भैंसों के मालिक है उसके साथ समझौते के आधार पर सीआरपीसी की धारा 482 के तहत एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप यह है कि वह तेज गति से लापरवाही से बस चला रहा था और बस ने सड़क के किनारे जा रही भैंसों/बछड़ों को टक्कर मार दी, जिसके परिणामस्वरूप एक भैंस की मौत और दूसरी घायल हो गई। हाईकोर्ट ने कहा कि जानवर मूक हो सकते हैं, लेकिन एक समाज के रूप में हमें उनकी ओर से बोलना होगा और जानवरों को कोई दर्द या पीड़ा नहीं होनी चाहिए। जानवरों के प्रति क्रूरता से उन्हें मानसिक पीड़ा भी होती है। सभी जानवरों को सम्मान और प्रतिष्ठा का अधिकार है और कानून द्वारा इसे संरक्षित किया जाना आवश्यक है। जानवर इंसानों की तरह सांस लेते हैं और उनमें भी भावनाएं होती हैं। उन्हें भोजन, पानी, आश्रय, सामान्य व्यवहार, चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होती है। जानवरों को जीवन और शारीरिक अखंडता, सम्मान और गरिमा का अधिकार है। इन टिप्पणियों के आधार पर हाईकोर्ट ने समझौते के आधार पर एफआईआर रद्द करने से इन्कार कर दिया।
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