पंजाब विधानसभा के शुक्रवार को एक दिवसीय सत्र के दौरान सदन में दो कोरोना पॉजिटिव कांग्रेसी सदस्यों के मौजूद रहने का मामला तूल पकड़ लिया है। स्वास्थ्य विभाग ने फैसला लिया है कि सदन में मौजूद रहे सभी सदस्यों, अधिकारियों व कर्मचारियों का दोबारा कोरोना टेस्ट कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शुक्रवार शाम को ही सेल्फ क्वारंटीन में जाने का फैसला ले लिया था। वहीं सदन में मौजूद रहे कांग्रेस के मंत्री और विधायकों को भी कोविड प्रोटोकाल के अनुसार कम से कम एक सप्ताह के लिए सेल्फ क्वारंटीन में जाना पड़ेगा। दूसरी ओर, अकाली दल जोकि सत्र के दौरान सदन से अनुपस्थित रहा, ने इस पूरे मामले को मुद्दा बना लिया है।
अकाली दल ने शनिवार को दावा किया कि वे कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुए ही सदन में नहीं आए थे। ऐसे में पॉजिटिव विधायकों को किस तरह सदन में प्रवेश देकर बाकी सदस्यों का जीवन खतरे में डाला गया? इस बीच, आम आदमी पार्टी ने भी कहा कि उनके निगेटिव आए विधायकों को इस आधार पर सदन में प्रवेश नहीं दिया गया कि उनका ड्राइवर या परिवार का सदस्य पॉजिटिव है। लेकिन कांग्रेस सरकार ने अपने पॉजिटिव विधायकों को सदन में प्रवेश करने से नहीं रोका।
विपक्ष के आरोपों पर राज्य सरकार की चुप्पी के बीच शनिवार को स्वास्थ्य विभाग ने फैसला लिया है कि सदन में उपस्थित रहे सभी लोगों का दोबारा टेस्ट कराया जाए। इस संबंध में कांग्रेस विधायकों के अलावा आप, लोक इंसाफ पार्टी और भाजपा के सदस्यों को पत्र भेजा जा रहा है, जिसमें टेस्ट के लिए समय व स्थान निर्धारित किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने बताया कि अगले दो दिन में सभी सदस्यों का दोबारा टेस्ट कराएगा। इसके साथ ही विधानसभा के अधिकारी और कर्मचारियों के लिए भी फिर से टेस्ट की व्यवस्था की जा रही है।