पंचकूला। करीब चार साल पुराने दुष्कर्म के मामले में पंचकूला की अदालत ने 60 वर्षीय व्यक्ति को संदेह का लाभ नहीं, बल्कि साक्ष्यों के अभाव और अभियोजन पक्ष की कहानी पर भरोसा न होने के आधार पर बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में माना कि मामले में पेश किए गए साक्ष्य आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। बचाव पक्ष के अधिवक्ता केतन खुराना ने अदालत में दलील दी कि 26 मार्च 2022 को दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था, जिसके संबंध में संबंधित थाने में कलंदरा भी दर्ज किया गया था। उनके अनुसार, इसी विवाद के कुछ दिन बाद रंजिश के चलते उनके मुवक्किल के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया गया। संवाद