बजट की विशेष बैठक में भाजपा पार्षद महेश इंदर सिंह ने प्रस्ताव रखा कि प्रत्येक बैठक के लिए सदस्यों को तीन हजार रुपये दिए जाएं, क्योंकि 500 रुपये से काम नहीं चलता। वहीं भत्ते में इजाफा करने पर बैठक में सदस्यों की भी संख्या बढ़ेगी। इसके अलावा बैठकों में रिफ्रेशमेंट के लिए भी दो हजार रुपये दिए जाएं। कांग्रेस पार्षदों ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
वर्तमान में पार्षदों को एक बैठक के लिए 500 रुपये भत्ता मिलता है। वहीं, बैठक में अधिकारियों को रिफ्रेशमेंट के लिए फिलहाल 650 रुपये मिलते हैं। महेश इंदर सिंह ने कहा कि 500 रुपये काफी कम हैं। इसे तीन हजार कर दिया जाए तो बैठकों में सदस्यों की संख्या में इजाफा हो जाएगा। जो बैठक में आएगा उसे ही भत्ता मिलेगा। इसके अलावा रिफ्रेशमेंट के लिए अधिकारियों को 650 रुपये मिलते हैं। कम भत्ता मिलने के कारण अधिकारियों को अपनी जेब से रुपये देने पड़ते हैं इसलिए इसकी राशि भी दो हजार कर दी जाए।
विचार विमर्श के बाद भाजपा पार्षदों ने एक बैठक का 2 हजार रुपये मानदेय देने का प्रस्ताव दिया, बाद में इसे तीन हार रुपये ही रखा गया है। साथ ही रिफ्रेशमेंट के प्रस्ताव को भी पास कर दिया। इस पर कांग्रेस पार्षदों ने विरोध शुरू कर दिया। विपक्ष के नेता देवेंदर सिंह बबला ने कहा कि आखिर जनप्रतिनिधियों को इतने भत्तों की क्या जरूरत। भाजपा पार्षदों ने कहा कि कांग्रेस अपनी झोली पहले ही भर चुकी है, उसे इन भत्तों की जरूरत नहीं है।
हाल ही में बढ़ा है पार्षदों का मानदेय
हाल ही में पार्षदों का मानदेय 10 हजार से 15 हजार रुपये किया गया है। इसके अलावा पार्षदों को हर माह 2500 रुपये मोबाइल का भत्ता मिलता है। इसके अलावा प्रति बैठक 500 रुपये भत्ता दिया जाता है। निगम की 14 सब कमेटियां हैं और 13 गांव विकास समिति हैं। जिसके चेयरमैन मनोनीत पार्षद हैं। एक पार्षद व मनोनीत पार्षद लगभग तीन से चार कमेटियों में सदस्य हैं। हर माह लगभग दो से तीन बैठक होती ही हैं। ऐसे में निगम पर लगभग 18 लाख का अतिरिक्त खर्च बढ़ जाएगा।
पिछली सदन की बैठक में गाड़ी और पेट्रोल की मांग की थी
जनवरी माह की बैठक में पार्षदों ने सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के लिए एक-एक गाड़ी व 250-250 लीटर पेट्रोल-डीजल का प्रस्ताव पास किया था। साथ ही प्रत्येक पार्षद के लिए 100-100 लीटर पेट्रोल-डीजल का प्रस्ताव भी आनन-फानन में पास कर दिया था। हालांकि उस समय विपक्ष ने मुद्दा नहीं उठाया, लेकिन इस बार विपक्ष ने सत्ता पक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।