छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलायके...
-कुमार बंधुओं ने प्राचीन कला केंद्र में नए साल के पहले दिन अपनी गायकी से सबको किया कायल
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। चंडीगढ़ के जाने माने सूफी और भजन गायक कुमार बंधु अनूप कुमार और हेमंत कुमार ने अपने सुरीले कंठ से नए साल के पहले दिन ऐसा समा बांधा कि श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। मंगलवार को सेक्टर- 35 के प्राचीन कला केंद्र आयोजित कार्यक्रम में कुमार बंधुओं ने अपनी पहली प्रस्तुति छाप तिलक छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलायके... पेश कर महफिल जीत ली। इसके बाद उन्होंने बाबा बुल्लेशाह की रचना साड्डे बल मुखड़ा मोड़ ले राग तोड़ी में पेश किया। इस मौके पर उन्होंने उस्ताद नुसरत फतेह अली खां और गीत सावन की भीगी रातों में गीत पेश कर सभी को मंत्र मुग्ध कर डाला। बुल्लेशाह ने एक और रचना नी मैं कमली... को अनूप और हेमंत ने राग तोड़ी में पेश किया। इसमें तराना को लोगों ने खूुुब सराहा। इसके बाद कुमार बंधुओं ने तू माने या न माने दिल दारा, नित्त खैर मंगां सोहणिया मैं तेरी दुआ न कोई होर मंगदी.., अंखियां उड़ीक दिया.. और दमादम मस्त कलंदर गाकर ऐसा समा बांधा की सभी दर्शक झूमने पर मजबूर हो गए। इस मौके पर की बोर्ड पर शीबू सिंह, तबले पर जयमल सिंह, ढोल पर मास्टर धर्मपाल और आक्टोपैड पर सतीश ने खूबसूरत संगत की। प्राचीन कला केंद्र की डिप्टी रजिस्ट्रार समीरा कौसल ने सभी कलाकारों को सम्मानित किया।