रामकृष्ण मिशन आश्रम में ‘युगद्रष्टा स्वामी विवेकानंद’ नाटक का मंचन
तीन दिवसीय हीरक जयंती समारोह का रविवार को हुआ समापन, 56 भक्तों को दी दीक्षा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
सेक्टर-15 स्थित रामकृष्ण मिशन आश्रम का तीन दिवसीय हीरक जयंती समारोह रविवार शाम को धूमधाम के साथ संपन्न हो गया।
इस दौरन ‘युगद्रष्टा स्वामी विवेकानंद’ नाटक का मंचन किया गया। इस नाटक का मंचन संत विवेकानंद मिलेनियम स्कूल पिंजौर के छात्र छात्राओं ने किया। इसमें करीब 20 बच्चों ने संजीव मंचन किया। ऑडियो-वीडियो, विजुअल का भी प्रयोग किया गया। इस नाटक में नरेंद्र की यात्रा को दिखाया गया है। नाटक में नरेंद्र से लेकर स्वामी विवेकानंद बनने तक का प्रेरणादायी प्रसंग है। रामकृष्ण और विवेकानंद के संवाद के अलावा स्वामी विवेकानंद के शिकागो के भाषण को लेकर भी बेहतर प्रस्तुति दी गई। रविवार को कार्यक्रम का शुभारंभ मंगल आरती और हवन से किया गया। सुबह दस बजे से लेकर दोपहर 12 बजे तक शप्तात्मानंद की अगुवाई में दो घंटे तक शप्तशती चंडी होम किया गया। सार्वजनिक कार्यक्रम में ‘श्री रामकृष्ण देव के अनुसार साधना पथ के प्रार्थना एवं शरणागति का महत्व’ पर स्वामी विष्णुपदनंदा ने व्याख्यान दिया। ‘मां शारदा देवी की अमृतवाणी’ पर रामकृष्ण मिशन के मैनेजिंग कमेटी के सदस्य एमपीएन पंकज ने अपनी बात की। पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ की प्रोफेसर नंदिता सिंह ने ‘शक्तिपुंज स्वामी विवेकानंद’ पर अपने विचार रखे। रामकृष्ण मिशन आश्रम पटना के सचिव स्वामी सुखानंदा ने रामचरित मानस पर दिव्य प्रवचन दिए। उन्होंने सुंदरकांड की दिव्य व्याख्या करते हुए विभिन्न प्रसंगों पर प्रकाश डाला। स्वामी सुखानंद ने अपने प्रवचन में कहा कि सत्संग से सबसे अधिक सुख मिलता है। उन्होंने कहा कि सीता भक्ति का स्वरूप हैं। अहंकार को छोड़ने पर ही सफलता मिलती है। ईर्ष्या को भी खत्म करने पर ही आप आगे बढ़ सकते हैं। साथ ही अपने से बड़ों का सम्मान करने की बात कही। उन्होंने कहा कि काम, क्रोध, लोभ और मोह राक्षस हैं। इन्हें मारना होगा। रामकृष्ण मिशन आश्रम चंडीगढ़ के सचिव स्वामी सत्येशानंद ने बताया कि रामकृष्ण संघ के उपाध्यक्ष और रामकृष्ण मठ चेन्नई के अध्यक्ष स्वामी गौतमानंद ने 56 इच्छुक भक्तों को दीक्षा प्रदान की। सत्येशानंद ने बताया कि जो लोग आध्यात्मिक जीवन व्यतीत करना चाहते हैं, रामकृष्ण और विवेकानंद का साहित्य पढ़ते हैं और साधना करते हैं उन्हें दीक्षा दी गई।