सभी केंद्र, ब्रिगेडियर चांदपुरी के निधन की साइड स्टोरी
पाकिस्तान में जन्मे ब्रिगेडियर चांदपुरी ने सड़ोआ से की थी दसवीं
कनाडा जाने से पहले अंतिम बार जमीन देखने आए थे गांव
अमर उजाला ब्यूरो
नवांशहर। सन 1971 में पाकिस्तान को खदेड़ने वाले ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी पिछले कुछ समय से भले ही अपने पैतृक गांव चांदपुर नहीं आए, लेकिन उन्होंने अपने गांव से हमेशा लगाव रखा। अक्सर कुछ महीने बाद वे अपने गांव सड़ोआ (जहां उनकी मौजूदा रिहायश थी) की जमीन देखने और नजदीकी रिश्तेदारों से मिलने आते रहते थे। पाकिस्तान के मिंटगुमरी में जन्मे ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह के पिता स्व. वतन सिंह आजादी से पहले अंग्रेजों की एंबुलेंस चलाते थे। आजादी के बाद चांदपुरी के पिता को सड़ोआ में जमीन अलाट हुई थी। गांव में करीब 14 एकड़ जमीन है और वहां पर उन्होंने पौधे लगाए थे। वैसे उनकी जमीन की देखरेख उनके चाचा के बेटे मनजीत सिंह व बलजीत सिंह चांदपुरी करते रहे हैं। स्व. चांदपुरी ने दसवीं तक की पढ़ाई गांव सड़ोआ के सरकारी स्कूल से की थी। इसके बाद की पढ़ाई उन्होंने होशियारपुर के सरकारी कालेज से की। उनके तीन बेटों में बड़ा बेटा हरदीप चांदपुरी चंडीगढ़ में बुक पब्लिशिंग का काम करते हैं, जबकि एक बेटा अमनदीप चांदपुरी कनाडा और एक बेटा गगनदीप सिंह जर्मनी में रह रहे हैं। निधन से कुछ समय पहले वे कनाडा गए थे और कनाडा जाने से पहले वे सड़ोआ अपने रिश्तेदारों से मिले थे। स्व. चांदपुरी के निधन पर उनके पैतृक गांव चंदपुर रुढ़की के सरपंच सतिंदर कुमार, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान एवं ब्लाक समिति के पूर्व चेयरमैन हरअमरिंदर सिंह रिंकू ने गहरा दुख प्रकट करते हुए कहा कि ब्रिगेडियर कुलदीप चांदपुरी ने उनके गांव का नाम राष्ट्र ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। स्व. कुलदीप चांदपुरी के निधन से जो घाटा हुआ है, वह कभी पूरा नहीं हो सकता।