डाइनिंग टेबल पर मिलता है मिड डे मील
सरकारी स्कूलों के लिए मिसाल बना सांधरा गांव का स्कूल
प्रिंसिपल की ओर से तीन होनहार बच्चों को हर वर्ष 11 हजार रुपये
स्कूल के विकास पर लोगों की मदद से खर्च किए जा चुके हैं साढ़े छह लाख रुपये
छात्राओं के लिए सेनेटरी नैपकिन वैंडिंग मशीन व इनसीनेटर की भी व्यवस्था
अमर उजाला ब्यूरो
होशियारपुर। सरकारी स्कूलों को सुव्यवस्थित करने को काम कर रहे लोगों व स्कूलों के लिए सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल सांधरा इन सब स्कूलों के लिए उदाहरण बन गया है। स्कूल में सभी बच्चे पूरी ड्रेस में आते हैं और प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर सभी बच्चों को आई कार्ड मिला है। स्कूल में पढ़ाई तो असरदार है ही साथ में व्यवस्था भी बेमिसाल है। यही कारण है कि यह जिले का पहला ऐसा सरकारी स्कूल था, जहां सबसे पहले मिड डे मील डाइनिंग टेबल पर शुरू हुआ। धीरे-धीरे जिले के कई ऐसे स्कूल हैं, जिन्होंने स्कूल की इस व्यवस्था से सीख लेते हुए अपने स्कूलों में भी डाइनिंग टेबल पर मिड डे मील देना शुरू किया। यह बात इस ओर इशारा करती है कि जिले के अन्य स्कूल भी स्कूलों में अच्छी व्यवस्था लागू करने के लिए तत्पर रहते हैं। इस स्कूल में ऐसी ही अन्य कई व्यवस्थाएं है जो इसे बाकी स्कूलों से अलग करती है और यह सब स्कूल के प्रिंसिपल तेजिंदर कुमार की मेहनत का ही फल है। वे न सिर्फ स्कूल के विकास के लिए काम कर रहे हैं, बल्कि अपनी जेब से भी पैसा खर्च कर बच्चों को प्रोत्साहित करने में कोई कमी नहीं छोड़ते। प्रिंसिपल तेजिंदर कुमार हर वर्ष अपनी तरफ से बारहवीं के पहले, दूसरे व तीसरे स्थान पर आने वाले विद्यार्थियों को 11 हजार रुपये नकद पुुरस्कार के तौर पर देते हैं। डिप्टी कमिश्नर ईशा कालिया ने प्रिंसिपल व स्कूल स्टाफ की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे अध्यापकों के कारण ही सरकारी स्कूलों में एक अच्छा सिस्टम है। जिस कारण विद्यार्थियों को एक बढ़िया माहौल में मानक शिक्षा मिल रही है। प्रिंसिपल तेजिंदर कुमार ने कहा कि स्कूल में जो विकास हो रहा है वह टीम वर्क का परिणाम है। उन्होंने कहा कि स्कूल स्टाफ की ओर से जहां स्कूल के विकास में योगदान डाला जा रहा है, वहीं जरतमंद विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं भी मुहैया करवाई जा रही है। इसके अलावा अध्यापक मेहनत के कारण ही स्कूल का नतीजा शत प्रतिशत रहता है। उन्होंने निर्णय किया है कि वे रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले अपने फंड का एक चौथाई हिस्सा इस स्कूल को देंगे और ट्रस्ट बनाकर दानी लोगों की मदद से इसमें ज्यादा से ज्यादा पैसा जमा कराया जाएगा, जिससे मिलने वाले ब्याज से स्कूल के विद्यार्थियों की फीस भरी जाए और ट्रस्ट का पूरा पैसा स्कूल के विकास पर खर्च किया जाए। स्कूल की वेलफेयर कमेटी बनाई गई है और यह कमेटी लोगों के सहयोग से स्कूल के विकास में साढ़े छह लाख रु पये लगा चुकी हैं। स्कूल की छात्राओं के लिए विशेष प्रयास करते हुए उन्होंने स्कूल में एक सैनेटरी नैपकिन वैंडिंग मशीन भी लगाई है और उसको जलाने के लिए इनसीनेटर की भी व्यवस्था की गई है जो कि छात्राओं के लिए काफी मददगार साबित हुआ है। इसके अलावा स्कूल में ई लैब विशेष तौर पर सुसज्जित है, जिसमें प्रिंसिपल तेजिंदर सिंह की ओर से एयर कंडिशनर भी लगाया गया है। स्कूल में आर्ट एंड क्राफ्ट लैब को अत्याधुनिक बनाने पर काम चल रहा है। स्कूल में प्रिंसिपल तेजिंदर की ओर से अपने स्तर पर बुक बैंक शुरू करने की योजना पर काम चल रहा है, जहां बच्चों को कोर्स से लेकर प्रतियोगी परीक्षा के लिए किताबें पढने को मिल सकेंगी। प्रिंसिपल तेजिंदर ने कहा कि इस वर्ष उनकी योजना में स्कूल में स्पोर्ट्स रूम बनाना है।