घरों में बनने लगी गोबर की बुरकलियां, होलिका दहन पर होगी पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। होली का त्योहार जैसे-जैसे करीब आता जा रहा है, वैसे ही बृज क्षेत्र में तैयारियां तेज हो गई हैं। एक ओर जहां शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में होली मंगल मिलन समारोह आयोजित होने लगे हैं। वहीं, होलिका दहन के लिए घरों में महिलाएं गोबर की बुरकलियां बना रही हैं। बाजारों में भी त्योहार को लेकर खासी रौनक देखी जा रही है। बृज क्षेत्र में होलिका में बुरकलियों का खासा महत्व है। लोग इसकी पूजा करते हैं।
बाजार में भी बिकने के लिए बनाई जा रही बुरकलियां
आधुनिकता की दौड़ में अब बुरकलियों का भी व्यवसायीकरण होने लगा है। जहां पहले महिलाएं होलिका दहन के लिए बुरकलियों को बनाने के लिए पशु पालकों के घरों से भैंस या गाय का गोबर लाकर बड़े चाव से बनाती थीं, लेकिन अब शहरी क्षेत्रों में अधिकांश महिलाएं बुरकलियां बनाने के बजाय बाजार से खरीदती हैं। ऐसे में बाजारों में कई स्थानों पर बुरकलियां बिकने के लिए रखी देखी जा सकती हैं। बुरकलियां बेचने वाले 100 से 200 रुपये तक में बुरकलियां बेचते हैं।
मैं हर साल गोबर से बुरकलियां तैयार करती हूं व इनका प्रयोग होलिका दहन के दौरान पूजन के लिए करती हूं। इस बार भी मैंने बुरकलियां बनाई हैं व सूखने के लिए रख दी हैं। -ज्योति
मैं पहले बुरकलियां बनाती थी, लेकिन जब से हम यहां ओमेक्स सिटी पलवल में आकर रहने लगे हैं, तब से बुरकलियां बनाना छोड़ दिया है। अब मैं बाजार से खरीदकर बुरकलियां लाती हूं और उसी से पूजा करती हूं। -सरोज देवी
मैं हर साल दिवाली पर मिट्टी के बने दीपक बेचती हूं व अब होली पर्व के लिए गोबर से बुरकलियां बनाकर बेचती हूं। होली पर पहले इक्का-दुक्का महिलाएं ही बुरकलियां खरीदने आती थीं, लेकिन अब पिछले चार-पांच साल से अच्छी-खासी बुरकलियां बिक जाती हैं। इसलिए मैं एक महीने पहले ही बुरकलियां बनानी शुरू कर देती हूं। -रामबती