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अब बोरवेल के लिए लेनी होगी अनापत्ति प्रमाण पत्र

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अब बोरवेल के लिए लेनी होगी अनापत्ति प्रमाण पत्र
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हथीन। भूमिगत जल के अत्यधिक दोहन के कारण राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के तेवर कडे़ हो गए हैं। एनजीटी ने इस बारे में प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अब नए लगने वाले ट्यूबवेलों व सबमर्सिबलों के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने होंगे। एनजीटी ने आदेशों में साफ कहा गया है कि जिन औद्योगिक इकाइयों ने बोरवेल के लिए जल वैज्ञानिक (हाइड्रोलोजिस्ट) से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिया है वे एक माह में अपना अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना सुनिश्चित करें। इसके लिए औद्योगिक इकाइयों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। उसके बाद ही अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलेगा। हरियाणा राज्य औद्योगिक विकास निगम (एचएसआईडीसी) ने ऐसी औद्योगिक इकाइयों की सूची तैयार की है जिन्होंने अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिए हैं। यदि समय रहते अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिया तो हाइड्रोलोजिस्ट विभाग निरीक्षण करेगा और इकाइयों पर जुर्माना व सीलिंग भी करेगा। दरअसल, हथीन सबडिवीजन भूजल दोहन के मामले में संकट में है और इसे सरकार ने डार्क जोन भी घोषित किया हुआ है। इस बारे में हथीन के उपमंडल अधिकारी नागरिक वकील अहमद का कहना है कि एनजीटी के आदेशों की पालना कराई जाएगी। जो भी उल्लंघन करते पाए जाएंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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