नूंह-गुरुग्राम सीमा पर चाहल्का की पहाड़ियों को किया जा रहा दूषित
वन विभाग जांच में जुटा, वेयरहाउस और कोल्ड स्टोरेज पर शक
संवाद न्यूज एजेंसी
तावडू। नूंह तावडू और गुरुग्राम सीमा से सटे अरावली पहाड़ में वेस्ट और कचरा फेंकने का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। रात के अंधेरे में भारी मात्रा में बदबूदार कचरा और वेस्ट मटेरियल पहाड़ियों में फेंका जा रहा है, जिससे पर्यावरण दूषित हो रहा है और स्थानीय लोग बदबू से परेशान हैं।
ग्राम चाहल्का के ग्रामीणों के मुताबिक नूंह और गुरुग्राम की सीमा पर लगती अरावली पहाड़ियों में रोजाना रात के अंधेरे में गाड़ियां आती हैं और कचरा खाली करके चली जाती हैं। इस कचरे में प्लास्टिक, गंदगी और अन्य वेस्ट शामिल है, जो वन्य जीवों के लिए बेहद नुकसानदायक है। जब मामला सुर्खियों में आता है तो आरोपी इसे रात में ही जला देते हैं, जिससे प्रदूषण और भी बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तावडू-सोहना रोड पर बड़ी संख्या में वेयरहाउस और कोल्ड स्टोरेज बन गए हैं। इनका वेस्ट जिनका सही तरीके से निस्तारण होना चाहिए, उसे चोरी-छिपे यहां लाकर फेंका जा रहा है। ठेका और फीस सरकार से निस्तारण के नाम पर ली जाती है, लेकिन असल में कचरे को अरावली में डंप किया जा रहा है। जिस रास्ते से गाड़ियां आती हैं, वहां कुछ लोगों के सीसीटीवी भी लगे हैं, लेकिन मिलीभगत के चलते कोई रोकटोक नहीं हो रही है।
यह क्षेत्र गुरुग्राम और नूंह वन मंडल की सीमा के अधीन आता है, इसलिए कई बार दोनों मंडल एक-दूसरे के क्षेत्र की बात कहकर मामला टाल देते हैं। इससे पहले भी अरावली के खोरी कला, छारोडा और केएमपी एक्सप्रेस-वे के साथ लगते पहाड़ी क्षेत्र में लगातार कचरा फेंकने के मामले सामने आ चुके हैं। भिवाड़ी और नूंह क्षेत्र में भी ऐसे मामलों में पुलिस और वन विभाग को मुकदमा दर्ज करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी।
इस संबंध में वन क्षेत्र के रेंज अधिकारी देव कुमार का कहना है कि वन विभाग की टीम जानकारी जुटाने में लगी है। जल्द ही पता लगाकर यदि यह उनके क्षेत्र में पाया गया तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी, इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।