एनएच-टू स्थित एक मंदिर आज भी ऐसा है, जिसके कपाट वर्ष में केवल दो बार कुछ घंटों के लिए ही खुलते हैं। नवरात्र में सप्तमी के दिन काली मां की पूजा के लिए आम जनता के लिए कपाट खोले जाते हैं।
इसके बाद मंदिर को बंद कर दिया जाता हैं। शुक्रवार (सप्तमी) के दिन देवी के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। जवाहर नगर कैंप स्थित मढ़ी के नाम से मशहूर मंदिर जनता के लिए शुक्रवार शाम उस समय खोला गया, जब आसमान में पहला तारा नजर आया।
मंदिर के महंत तीर्थदास बताते है कि साढ़े छह बजे शुरू हुई भक्तों की भीड़ देर रात तक लगी रही। नवरात्र में सप्तमी के दिन ही कपाट खुलते हैं, बाकी दिनों में वे मंदिर में बैठकर पूजा करते हैं। इसके बाद अष्टमी के दिन मंदिर में कीर्तन किया जाता है।
खास है मंदिर
महंत तीर्थ दास ने बताया कि मंदिर में देवी के नौ रूप, भैरों के नौ रूप व काली के नौ रूप विराजमान हैं। मूर्तियां नौ सामग्रियों गूगल, गाय का गोबर, चंदन, मिट्टी, देसी घी, गोला, पीपल, बड़ की लकड़ी व गाय के दूध से बनी हुई हैं। उन्होंने बताया कि यह मूर्तियां सैकड़ों साल पुरानी हैं और सिद्ध हैं।