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बेरोजगारों को फर्जी नियुक्ति पत्र देकर ठगी करने वाले दो गिरफ्तार

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फर्जी नियुक्ति पत्र जारी कर ठगी करने वाले आरोपी - फोटो : Palwal
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पलवल। सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा देकर फर्जी नियुक्ति पत्र जारी कर ठगी करने वाले गिरोह के दो सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान नई दिल्ली के मंडावली निवासी अर्जुन टाक और विनोद कुमार निवासी लक्ष्मी नगर के रूप में हुई। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से फर्जी नियुक्ति पत्र, कंप्यूटर, मोबाइल, प्रिंटर, सरकारी स्टैंप, स्टांप पेपर, विभिन्न सरकारी विभागों के प्रिंटिंग लेटर पेड, लिफाफे, 12 हजार रुपये तथा दस्तावेज आदि बरामद किए हैं। पुलिस ने आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया है।
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जिला पुलिस अधीक्षक दीपक गहलावत ने शुक्रवार को बताया कि चांदहट थाना क्षेत्र के गांव मीसा निवासी उमेश नियुक्ति पत्र लेकर अदालत में जिला सत्र न्यायाधीश के सामने पेश हुआ था। इस नियुक्ति पत्र में उसे जिला अदालत में चपरासी के पद पर नौकरी ज्वाइन करने को कहा गया था। जब उमेश अदालत पहुंचा तो नियुक्ति पत्र फर्जी निकला। इसके बाद जिला सत्र न्यायाधीश द्वारा दी गई जानकारी और उमेश की शिकायत पर जांच की गई तो पता चला कि उमेश से 26 हजार रुपये खाते में डलवाकर उसे फर्जी नियुक्ति पत्र जारी किया गया है। इसके बाद साइबर सेल और पुलिस टीम ने डीएसपी के नेतृत्व में जांच शुरू कर दी। जांच में पता चला कि उमेश को नई दिल्ली के मंडावली निवासी अर्जुन टाक द्वारा फर्जी नियुक्ति पत्र दिया गया है। पुलिस ने तुरंत ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी से पूछताछ और उसकी निशानदेही पर दूसरे आरोपी विनोद कुमार निवासी लक्ष्मी नगर, नई दिल्ली को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों का एक साथी मनोज निवासी सुरीर, जिला मथुरा अभी फरार है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आरोपियों से फर्जी नियुक्ति पत्र बनाने के संबंधित काफी सामान बरामद किया गया है। उन्होंने बताया कि आरोपियों ने पलवल के तीन बेरोजगार युवाओं के साथ-साथ फरीदाबाद में भी तीन युवाओं से ठगी की है। अभी आरोपियों से और अधिक जानकारी जुटाई जा रही है।
8वीं पास आरोपी ने इंटरनेट से निकाली सूची
मुख्य आरोपी अर्जुन टाक मात्र आठवीं कक्षा तक पढ़ा है। लेकिन, वह कंप्यूटर और मोबाइल की पूरी जानकारी रखता है। जल्द रुपये कमाने के चक्कर में अर्जुन ने ठगी का यह तरीका ढूंढ निकाला। बताया गया कि अर्जुन ने सरकारी विभागों की वेबसाइटों से सरकारी नौकरी पाने के लिए किए गए आवेदन की वेटिंग सूची निकाल ली। वहीं से उसने यह तरीका खोज निकाला। इसके बाद आरोपी अर्जुन ने सरकारी विभागों में नौकरियों की सूची जारी होने के बाद वेटिंग सूची में शामिल किए जाने वाले बेरोजगारों के नाम, नंबर, पते निकाल लिए। इसमें विनोद और मनोज को भी शामिल कर लिया। इसके बाद नई दिल्ली स्थित लक्ष्मी नगर में एक मकान में फर्जी नियुक्ति पत्र बनाने शुरू कर दिए। वेटिंग सूची से बेरोगजारों के नाम लेकर उनके फर्जी नियुक्ति पत्र बनाकर युवाओं को ठगना शुरू कर दिया।
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50 हजार रुपये तक ठगते थे
आरोपी छोटे पदों के फर्जी नियुक्ति पत्र जारी कर युवाओं से 10 से 25 हजार रुपये तक ठगते थे। जबकि, क्लर्क, सुपरवाइजर और अन्य पदों के लिए 50 हजार से अधिक रुपये ठगते थे। अर्जुन अपने ही खाते में युवाओं से रुपये डलवाता था। खाते में डलवाई धनराशि ने ही अर्जुन और उसके साथियों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
साइबर अपराध और ठगी के मामले में एक दर्जन गिरफ्तार
जिला पुलिस अधीक्षक दीपक गहलावत का कहना है कि साइबर अपराधों और इस तरह लोगों से ठगी करने वाले करीब एक दर्जन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करने वाले दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उनके तीसरे साथी की गिरफ्तारी के लिए भी छापेमारी की जा रही है। जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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