पलवल। दादरी-मुंबई रेलवे फ्रेट कॉरिडोर के अधिगृहीत जमीन में हुई धांधली के मामले में उप जिला अधिकारी (एसडीएम) की संलिप्तता मिलने पर अधिकारियों व जमीन की रजिस्ट्री कराने वालों के बीच संबंधों की जांच शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री के आदेश पर एसआईटी द्वारा सभी खरीदारों को नोटिस भिजवा दिए गए हैं। खासकर जींद व कैथल जिले के उन दो लोगों पर सरकार की विशेष नजर है, जिनके द्वारा पलवल में आकर 28-28 वर्ग गज जमीन की रजिस्ट्री कराई गई है। पहले इस मामले में धोखाधड़ी की धारा में जांच की जा रही थी। अब भ्रष्टाचार, गबन और अमानत में खयानत की धाराएं भी जोड़ दी गई हैं।
एसआईटी द्वारा इन सभी को भेजे गए नोटिस भी टुकड़ों में भेजे गए हैं। जिस हिस्से में जितने लोगों द्वारा जमीन की रजिस्ट्री कराई गई है, उतने ही लोगों को नोटिस भेजा गया है। अलग-अलग हिस्सों की जमीनों के नोटिस भेजे गए हैं व तीन दिन में जांच समिति के सामने पेश होने के आदेश दिए गए हैं। वहीं इस मामले में बनाए गए आरोपियों में से एक आरोपी ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत भी ले ली है। हालांकि जिला उपायुक्त के बयान पर 9 जुलाई को जोड़ी गईं अन्य धाराओं में भी आरोपी ने फिर से जमानत लगा दी है। जिसमें उच्च न्यायालय में 13 जुलाई को सुनवाई होनी है।
यह है मामला
यूपी के दादरी से नवीं मुंबई रेलवे फ्रेट कॉरिडोर के लिए जिले के करीब 10 गांवों की जमीन अधिगृहीत की गई। गांव असावटी, जटौला, मैदापुर, पृथला में रेलवे फ्रेट कारिडोर के लिए अधिगृहीत जमीन का अवार्ड घोषित कर दिया गया। रेलवे की पॉलिसी के अनुसार जिस किसान की जमीन ली गई, उसे सरकारी नौकरी या पांच लाख रुपये अतिरिक्त दिए जाने थे। पांच लाख रुपये लेने के लिए 6, 7, 12, 15 और 30 गज के टुकड़ों में की गई रजिस्ट्रियों में करीब 400 लोग शामिल कर लिए गए। जमाबंदी में जहां एक व्यक्ति जमीन का मालिक है, वहीं रजिस्ट्री में 30 से 40 लोगों को शामिल किया गया। जमीन का अवार्ड घोषित करते समय एक नंबर पर एक व्यक्ति के नाम अवार्ड घोषित किया जाना था और वही राशि टुकड़ों में बांटी जानी थी।
छह गज जमीन का 45 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से 5578 रुपये का मुआवजा 31 लोगों में दिया जाना था। रेलवे नियमों के तहत सभी 31 लोगों को पांच-पांच लाख के हिसाब से डेढ़ करोड़ रुपये अवार्ड घोषित कर दिया गया। करीब 100 गज जमीन के लिए 400 मालिकों को साढे़ 22 करोड़ रुपये अवार्ड घोषित किया गया। रेलवे अधिकारियों को इतनी मोटी राशि जारी करने के दौरान शक हुआ और मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की गई।
मामले का खुलासा होने पर जांच के लिए अतिरिक्त उपायुक्त सतेंद्र दूहन के नेतृत्व में कमेटी गठित की गई। इसमें सीईओ जिला परिषद अमित कुमार और डीआरओ रामफल कटारियों को शामिल किया गया। जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से पहले फरीदाबाद रेंज कमिश्नर संजय जून ने दस्तावेज की जांच की थी। कमेटी ने तीन एसडीएम, पांच तहसीलदार, चार रजिस्ट्री क्लर्क सहित 20 लोगों को मामले संलिप्त पाया था। जांच रिपोर्ट सीएम को सौंप दी गई थी।
एसडीएम को कर दिया गया था निलंबित
इस मामले में पांच जून को संलिप्तता मिलने पर पलवल के एसडीएम कंवर पाल को निलंबित कर दिया गया था, जबकि एचसीएस अधिकारी जितेंद्र कुमार व नरेश को नोटिस दिए गए थे। इससे पहले जांच कमेटी द्वारा पलवल के एसडीएम कार्यालय को 10 मार्च को सील किया गया था। तब एसडीएम छुट्टी लेकर चले गए थे। बाद में उन्हें निलंबित कर दिया गया।
आठ कर्मियों पर दर्ज हुआ था धोखाधड़ी का केस
उपायुक्त नरेश नरवाल के बयान पर पिछले दिनों 6 पटवारियों सहित 8 कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस ने धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने जांच में पाया कि मामला केवल धोखाधड़ी का नहीं है। इसमें गबन किया गया है और अमानत में खयानत बरती गई है। डीपीसी एक्ट का दुरुपयोग किया गया है और भ्रष्टाचार है। जिसके बाद उपायुक्त के बयान पर पुलिस ने गबन, अमानत में खयानत तथा भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत भी धाराएं जोड़ दीं।
अब दिए गए हैं 93 लोगों को नोटिस
एसआईटी ने अब फिर से अन्य धाराएं जोड़ने के बाद व मुख्यमंत्री की तरफ से दिशा-निर्देश मिलने के बाद जमीन खरीदने 93 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। ये नोटिस मामले की जांच करने के साथ ही मामले में संलिप्त एचसीएस अधिकारियों व तहसीलदार और पटवारियों के साथ संबंध का पता लगाने के लिए भी दिए गए हैं। इन सभी को नोटिस भेजकर कहा गया है कि वे तीन दिन के अंदर पुरानी कोर्ट परिसर में डीएसपी कार्यालय में या लघु सचिवालय के कमरा नंबर 333/334 में पेश होने के निर्देश दिए गए हैं।
कंप्यूटर आपरेटर करा चुका जमानत
इस मामले में संलिप्त डाटा कंप्यूटर आपरेटर वरुण गर्ग पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत करा चुका है। वरुण गर्ग की दादी रामरति के नाम भी जमीन की रजिस्ट्री हुई थी। उस मामले में ही उसने उच्च न्यायालय से जमानत कराई थी। उपायुक्त के बयान पर गबन, भ्रष्टाचार अधिनियम और अमानत में खयानत की धाराएं भी जोड़ दी गई हैं। जिसमें वरुण गर्ग ने फिर से उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर कर दी है। जिस पर न्यायालय में 13 जुलाई को सुनवाई होगी।
दो नामों की गंभीरता से हो रही जांच
एसआईटी द्वारा दो आरोपियों की गंभीरता से जांच की जा रही है। क्योंकि जमीन में रजिस्ट्री कराने वाले ये दोनों आरोपी दूसरे जिले के हैं। सरकार को शक है कि इन दोनों का संबंध मामले में एचसीएस अधिकारियों या फिर किसी तहसीलदार से है। इनमें 59 गुलयाना सोंगरी कैथल निवासी सालिंद्र सिंह व विनोद कुमार निवासी गांधी नगर जींद हैं।
वर्जन-
93 लोगों को नोटिस जारी किया गया है और 406 व 409 के साथ-साथ भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराएं जोड़ दी गई हैं। आरोपियों को नोटिस जारी कर ब्यान दर्ज किए जा रहे हैं। इसके बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर गिरफ्तारी शुरू होगी। - सत्य नारायण, निरीक्षक एसआईटी