पलवल। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर नए कृषि कानूनों के विरोध में अटोहां चौक पर चल रहा धरना मंगलवार को भी जारी रहा। इस दौरान किसान नेताओं ने कहा कि कृषि पहले से ही घाटे का सौदा बनी हुई है। ऐसे में उसको लाभकारी बनाने की जिम्मेदारी सरकार की है, लेकिन केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के लागू होने के बाद किसान पूंजीपतियों के रहमोकरम पर ही जिंदा रहेंगे। कृषि कानूनों ने फसलों के सरकारी समर्थन मूल्य को पूरी तरह से अप्रासंगिक बना दिया है। इसलिए शोषित और पीड़ित किसानों के पास संघर्ष के सिवाय कोई रास्ता नहीं है।
धरने में किसान नेता महेंद्र सिंह चौहान ने किसान-मजदूर पंचायत को सफल बनाने के लिए ज्यादा से ज्यादा किसानों को जोड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार के अनुसार, कृषि कानून बनने के बाद किसान अपनी उपज को देश के किसी भी कोने में, किसी भी व्यापारी को अपने मनमाफिक भाव पर बेचने और मुनाफा कमाने के लिए स्वतंत्र है। लेकिन, वास्तविकता यह है कि देश में कुल 86 फीसदी किसानों के पास दो हेक्टेयर से भी कम भूमि है। सीमांत और लघु जोत के किसान अनाज बेचने के लिए बड़े-2 व्यपारियों के साथ मोल भाव करने की क्षमता नहीं रखते। छोटे किसान ज्यादा कीमत पाने के लिए फसल का भंडारण नहीं कर सकते। किसान दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए फसल के दाम बढ़ने का इंतजार भी नहीं कर सकते। इस कारण उन्हें औने-पौने दामों पर अपनी फसल बेचनी पड़ेगी।
किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में जारी धरने की अध्यक्षता हरीचंद जाखड़ ने की, जबकि संचालन दरियाब सिंह सौरोत ने किया। धरने को सोहनपाल चौहान, रूपराम तेवतिया, बीर सिंह गायक, रमेश चंद, धनीराम तेवतिया, अच्छेलाल जोधपुर, रोशनलाल अल्लीका, चंद्रमुनि धतीर, हरी सिंह चौहान, इंद्र सिंह रावत ने संबोधित किया।